Thursday, August 6, 2020

कक्षा 10 पर्वत प्रदेश में पावस

कक्षा 10
पाठ -5
स्पर्श 
पर्वत प्रदेश में पावस 
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर 
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1. पावस ऋतु में प्राकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते है? कविता के आधार पर स्पष्ट  कीजिए l 
उत्तर : पावस ऋतु में प्रकृतिक अनेकों परिवर्तन होते हैं l आकाश में काले बादल छाए रहते हैं l चारो तरफ सिर्फ पानी ही पानी दिखाई देता क्या धरती क्या असमान l रिमझिम बारिस की फुहारे पड़ने लगती है l तालाब और नदी पानी से भर जाते हैं l चारों तरफ हरियाली छा जाती है l पहाड़ी इलाके में प्राकृतिक का रूप पल – पल बदलने लगता है l घने बादल छाने से कुछ भी दिखाई नहीं देता है l ऐसा लगता है की आसमान धरती पर टूट पडा है l कवि के अनुसार इतनी बारिस होती है कि पहाड़ों पर उगे विशाल शाल के पेड़ तक दिखाई नहीं देते l सब कुछ विलुप्त हो जाते, जल से उठता हुआ धुआ आकाश में उड़ने लगता है l कवि को ऐसा लगता है जैसे इंद्र देवता अपनी जादूगरी दिखा रहे है l 

2. ‘मेखलाकार’ शब्द का क्या अर्थ क्या है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग क्यों किया है ?
उत्तर : मेखलाकार शब्द का अर्थ है गोल घेरे वाला l कवि ने इस शब्द का प्रयोग पर्वत के विशेषण के रूप में किया है l पर्वत का आकार गोल होने की वजह से उसका विशाल प्रतिबिम्ब नीचे स्थित तालाब में दिखाई देता है l 

3.’सहस्त्र दृग सुमन’ से क्या तात्पर्य है ? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए  किया होगा? 
उत्तर : ‘सहस्त्र दृग सुमन’ से कवि का यह कहना चाहता है कि पर्वत पर खिले हुए पुष्प अपने आँखों के द्वारा नीचे संचित जल राशि में अपनी तसवीर बड़े ध्यान से देखते हैं l 

4. कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों ? 
उत्तर : कवि ने तालाब की समानता दर्पण के साथ की है क्योंकि तालाब के पानी रूपी दर्पण में पर्वत अपने विशाल रूप को निहारा करता है l 

5. पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे – ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे और वे किस बात से प्रतिबिंबित करते है ?
उत्तर : पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे – ऊँचे वृक्ष आकाश की ऊंचाई छूने के लिए आकाश को देख रहे थे आकाश की ओर वृक्षों को देखना उनके महत्वकांक्षाओं को प्रतिबिम्बित करता है l 

6. शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गएँ ?
उत्तर : शाल के वृक्ष मुसलाधार बारिश और धुंध से भयभीत होकर धरती में धँस गए l 

7. झरने किसके गौरव का गान कर रहे है बहते हुए झरनों की तुलना किससे की गई है?
ऊतर: झरने पर्वतों के गौरव का गान कर रहे है क्योंकि पर्वत ही उनका उद्गम स्थल है l झरनों की तुलना सफ़ेद मोती की लड़ियों के साथ की गई है l 

(ख) निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए –

1. है टूट पड़ा भू पर अंबर l
उत्तर : मुसलाधार बारिश की वजह से आकाश और धरती का अंतर कवि को मिटता हुआ सा प्रतीत हो रहा है l कवि को ऐसा लग रहा है जैसे आसमान धरती पर टूट पड़ा हो l 

2. यों जलद यान में विचर- विचर था इंद्र खेलता इंद्रजाल l 
उत्तर : पर्वतीय प्रदेश में होने वाली वर्षा के अद्भुत रूप को देखकर कवि को ऐसा लगता हा कि जल के देवता इंद्र बादल  रूपी सवारी में सवार होकर अपनी जादूगरी दिखला रहे हो l 

3. गिरिवर के उर से उठ – उठ कर 
  उच्चंकंक्षाओं – से तरुवर 
  है झाँक रहे नीरव नभ पर 
  अनिमेष अटल कुछ चिंतापर 
उत्तर : इन पंक्तियों के माध्यम से कवि वृक्षों को महत्वकांक्षी बता रहा है l कवि का कहना है कि वृक्ष, आकाश के सारे रहस्यों को जानने की उत्सुकता से असमान को लगातार देख रहे हैं l 

कविता का सौंदर्य 

प्रश्न 1. कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किस प्रकार किया गया है ? स्पष्ट कीजिए l 
उत्तर : प्रस्तुत कविता में मानवीकरण अलंकार के प्रयोग की वजह से कविता जीवंत हो गई है l पर्वत, झरना, पेड़, धरती, आकाश शाल वृक्ष और बादलों का मानवीकरण हुआ है l पर्वत अपनी ऑंखें फाड़- फाड़कर तलाब  में अपनी तसवीर देखने, बादल में पंख लगाकर इंद्र देवता द्वारा जादूगरी करना, वृक्षों को आकाश को एक टक निहारना, आकाश को धरती पर टूट पड़ना, शाल वृक्षों का धरती में धँस जाना l 

प्रश्न 2. आपकी दृष्टि में इस कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर करता है –
(क) अनेक शब्दों की आवृत्ति पर l 
(ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर l 
(ग) कविता की संगीतात्मकता पर l 
उत्तर : मेरे दृष्टि से कविता को सुंदर बनाने में सबसे ज़्यादा योगदान कविता की चित्रमयी का है l 

3. कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है l ऐसे स्थलों को छांटकर लिखिए l 
उत्तर : प्रस्तुत कविता में प्रकृतिक के सुकुमार कहे जाने वाले कवि पंत जी कविता में चित्रात्मक शैली का प्रयोग किए है l कविता में निम्नलिखित स्थलों पर चित्रात्मक शैली का प्रयोग हुआ है l 
पल – पल प्रकृतिक के रूप को बदलना l 
पर्वतों द्वारा अपनी तस्वीर पानी में देखना l 
झाग से भरे हुए झरनों का मधुर गीत-गा गाकर बहना l 
वृक्षों को असमान को एक टक देखना l 
पर्वत का गायब हो जाना l 
जल के देवता इंद्र द्वारा जादूगरी दिखाना l 
शाल के वृक्षों का जमीन में धँस जाना l         

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