Sunday, November 14, 2021

भाईटी

भाईटी (लघु कथा)

कृति डेढ़ साल की बहुत ही प्यारी बच्ची है। उसके पापा का नाम है राकेश तथा उसकी मम्मी का नाम है प्रज्ञा। सभी कृति को बहुत प्यार करते हैं।
कृति सबको पहचानती है। मामा, नाना, दादी, दादू, मम्मी पापा। टमाटर को टोमेनो बोलती है। आलू को पोटेनो बोलती है।  अपने आप को बिल्कुल नहीं पहचानती। जब भी खुद को आइना में देखती है खुश होकर- भाईटी, भाईटी...... बोलती है। 
(भाईटी अर्थात छोटा भाई।)


लेखिका
-डॉ . अर्चना पांडेय अर्चि

Wednesday, November 3, 2021

जगमग दीप जले


हम आओ मिलकर
एक ऐसा दीप जलाएँ
पूरी सृष्टि को रोशन बनाएँ
हर ओर छा जाए ख़ुशियाँ
तम न हो कहीं पर
रोशनी से भरा हो हर घर।

हम साफ़ कर लें
अपने विचारों को
जो विचारें वर्षों से हृदय में पड़ी
हमारे मन को और तन को
पहुँचा रही है नुकशान
साफ़ कर दें
उनको सदा के लिए
कर लें हल्का अपने मस्तिष्क को
भर लें खुशी अपने अंदर।

माफ़ करें ख़ुद को
और औरों को भी
अपने अंतर्मन के हर कोने में
एक दीप जलाएँ
खुशियों से जीवन महकाएँ।

हम भगवान को धन्यवाद करें
भगवान ने जो कुछ हमें दिया है
बहुत दिया है
हमें मनुष्य बनाया है
यह सर्वोत्तम उपहार है
हमारा मनुष्य जीवन।

अपने ज्ञान ज्योति से
पूरी सृष्टि को प्रकाशमय बनाएँ
आओ मिलकर हम दीप जलाएँ।

*-डॉ. अर्चना पांडेय अर्चि*
*डिब्रूगढ़, असम*

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*हिंद देश परिवार का 108 घंटे देवी दुर्गा को समर्पित वर्चुअल कार्यक्रम* *देश विदेश के रचनाकारों ने देवी मां के साथ घर की मां की पूजा का किया ...