Thursday, April 22, 2021

सेठ का बेटा



रघुवीर पांडेय अपने इलाके के बहुत बड़े व्यपारी है। उनके घर में लक्ष्मी जी का वास है। हर तरह से सम्पन्न रघुवीर  
की ज़िंदगी खुशियों से भरी हुई है। कहीं से भी कोई अभाव नहीं दिखता। खेती-बाड़ी भी खूब हैं। हर तरह के अनाज और सब्जियाँ हर मौसम में उनके खेत में लगी रहती हैं। हर तरह के फल से भी उनका बगीचा सुसज्जित रहता है। शायद ही कोई फल हो जो उनके बगीचे में न हो। वे खुद तो इन तमाम वस्तुओं का आनंद उठाते साथ में अपने रिश्तेदारों को भी समय-समय पर देते रहते। कई
बार तो वे लोग आकर लेकर जाते और कई बार रघुवीर पांडेय खुद उन्हें देने तक चले जाते। घर में बहुत सारे नोकर - चाकर, एकदम राजा के राज्य जैसी ख़ुशियाँ हर तरफ बिखरी रहती हैं। सब कुछ होने के बावजूद भी एक ऐसी बात थी जो उनके मन में कचोटती रहती। उनका व्यापार छोटे से शहर में था। ऐसे तो उस शहर में बहुत सारी इंग्लिश मीडियम की स्कूलें थी लेकिन कहीं भी इतने अच्छे से अंग्रेजी नहीं पढ़ाई जाती कि रघुवीर जी के बच्चे अंग्रेजी में बात कर सकें। लेकिन रघुवीर जी का यह बहुत बड़ा शौक था कि उनके बच्चे भी अंग्रेजी में गुटर गु कर के स्मार्ट बन जाए, बिल्कुल शहरों के बच्चों के जैसे। रघुवीर पांडेय और उनकी धर्मपत्नी हीरा देवी अक्सर इस बात को लेकर दुखी होते रहते। 

अक्सर गर्मियों की छुट्टी में उनकी बड़ी दीदी और उनके बच्चे अवश्य उनके घर आते। बड़ी दीदी के दो बेटे- लक्की और प्रिंस। दोनों आपस में अंग्रेजी में कई बार बात कर लेते। उन बच्चों को अंग्रेजी में बात करते देखकर हीरा देवी और रघुवीर पांडेय दोनों बच्चों को खूब स्मार्ट समझते।

हीरा देवी - अजी सुनते हो, हमरा भी मन कर रहा है कि हमारे बच्चे भी अंग्रेजी में बतियाएं। हाँ-हाँ ज़रूर काहे नाहीं, हमारे दोनों बच्चे भी अंग्रेज़ी में बतियाएँगे।
रुको हम आइडिया खोजते हैं। रघुवीर जी ने कहा।
जब आप आइडिया खोज रहे हैं तो आइडिया कितने देर तक नहीं मिलेगी, उसको मिलना ही होगा- हीरा देवी ने उम्मीद भरी आँखों से कहा।
अब दोनों प्राणी मिलकर आइडिया ढूँढने लगे।

इस बार गर्मी में भी बड़ी दीदी रेखा अपने दोनों बच्चों के साथ रघुवीर जी के घर पधारी। बच्चों को अंगेज़ी बोलते हुए देखकर रघुवीर जी और उनकी धर्म पत्नी अपने बच्चों के बारे में सोचने लगते।
एक सुबह हीरा देवी ने रघुवीर जी से कहा
अजी हमने आइडिया निकाल लिया है। अब हमारे बच्चे भी अंग्रेजी बोलेंगे।
रघुवीर जी की आँखे चमक उठी।
बताओ, बताओ जल्दी बताओ.....
ये तो बड़ी खुशी की बात है।
हमारे बच्चे अंग्रेजी में.....
भगवान सबकी सुनता है...
हमारा भी.....

हीरा देवी की आइडिया से उनके पति सहमत हो गए। आइडिया यह थी कि वे अपने तीन बच्चे आराध्या, रोशन और छोटू तीनों में से किसी एक को उनकी बड़ी दीदी रेखा के साथ शहर में भेज देंगे। जहाँ पर अच्छी अंग्रेजी की पढ़ाई होती है। अब यह तय करना बड़ा मुश्किल हो गया था कि तीन बच्चों में किसको भेजा जाए। आराध्या जो बड़ी बेटी है, घर का सारा काम देख लेती है। उसके जाने के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। छोटू तो छोटा ही है। रोशन का जाना तय हो गया। रोशन ही जायेगा बुआ रेखा के साथ शहर में और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलेगा।
अब जाने की तैयारी होने लगी। रोशन जाना नहीं चाहता था लेकिन, अपने मम्मी - पापा की ख्वाहिश पूरी करने के लिए उसको जाना ही पड़ा। 

रोशन एक नए सफ़र पर निकल चुका था जहाँ पर सब कुछ नया था। जहाँ उसका कोई पसंदीदा व्यक्ति नहीं था। उसकी दादी और उसके प्यारे दोस्तों की याद उसको सबसे ज़्यादा आती थी। उसके फूफा जी स्टेट बैंक के मैनेजर थे। बुआ के घर में हर वस्तुएँ थी। कोई भी चीज़ की कोई कमी नहीं। पर अपनानपन दूर -दूर तक नहीं था। बुआ के दोनों बेटे लक्की और प्रिंस, जैसे दो पुतले हो। हर काम समय पर होता। समय पर नहाना, समय पर पढ़ना,  समय पर स्कूल जाना, समय पर ट्यूशन पढ़ना तथा समय पर सो जाना। हर समान अपने जगह पर रहता। थोड़ा भी इधर -उधर नहीं। रोशन का एडमिशन विवेकानंद केंद्र विद्यालय में करा दिया गया। पर रोशन को कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। वे उसके स्कूल और मोहल्लें के दोस्तों को याद करके रो पड़ता। स्कूल में भी वह गुम-सुम सा रहता। गर्मी के दिनों में जब रात को छत पर सोता तो रात-रात भर तारें गिनते रह जाता, नींद नहीं आती। अंग्रेजी सीखने के लिए घर छोड़ने वाला रोशन पूरी दुनियादारी  सीख रहा था। सीख रहा था रिश्तेदारों का झूठा प्रेम जो सिर्फ दिखावा है। उसकी बुआ उससे छोटा- मोटा हर काम करवाती थी। स्कूल के बच्चे उसका मजाक उड़ाते थे। लेकिन उसको तो अंग्रेजी सीखनी थी। 
एक बरसात की रात जब सब लोग खाना खा रहे थे तब उसकी बुआ ने सबको सलाद दिया लेकिन रोशन को नहीं। जब रोशन के फूफा जी ने रोशन को सलाद नहीं दिए जाने का कारण पूछा तो बुआ ने झट कह दिया -
रोशन को तो शर्दी है। 
दस वर्ष का बच्चा रोशन, अपनी बुआ की इस करतूत पर अवाक रह गया।
पर कुछ न बोला।
उसकी माँ और दादी उसकी बड़ी बुआ रेखा को कितना प्यार और सम्मान देती हैं। जब वह अपने बच्चों के साथ उसके घर जाती हैं तो उनकी सेवा में कुछ भी कमी नहीं रहती। और उसके फूफा जी तो पहुना कह कर बुलाए जाते। फूफा जी की इतनी आवभगत होती जैसे भगवान हो। 

एक दिन रोशन की मम्मी का फोन आया, रोशन के मुँह से तो दो शब्द भी नहीं निकला। बस आँखों से आँसू बहते रहे। 
उसकी बुआ ने रोशन के हाथ से फोन लेते हुए कहा
भाभी असल बात ये है न, रोशन नया-नया अंग्रेजी बोलने को सीख रहा है। इसलिए वह शर्मा रहा है। बाद में वह आप से बात करेगा।

इस घटना के बाद रोशन के पिता को कुछ अच्छा महसूस नहीं हो रहा था। वे दूसरे दिन ही अपने बेटे से मिलने के लिए निकल पड़े। रास्ता जैसे बहुत लंबा हो गया हो। आख़िर अपने दीदी के घर पहुँच गए। दो घण्टे के बाद जब उनका बेटा स्कूल से घर आया तो बेटे की हालत देखकर वे निःशब्द रह गए। इतना मोटा -तगड़ा रोशन सुख सा गया था। उसका मुस्कराता चेहरा सुख सा गया था। अपने पापा की गोद में सिर रख जी भरकर रोया। 

रघुवीर जी को सब समझ आ गया था। बेटे को अंग्रेजी सिखाने का भूत उतर चुका था। 

रोशन घर पहुँच कर एक बार फिर हँसने खिलखिलाने लगा। उसके दोस्तों में खुशी की लहर दौड़ गई। दादी के जिगर का टुकड़ा दादी को फिर मिल गया था। 

दुकान पर अन्य लोग रोशन को देखकर बोले
सेठ का बेटा सेठ ही बनेगा न।
अंग्रेजी सीखकर अंग्रेज भला क्यों बनना।

*-डॉ. अर्चना, पांडेय अर्चि*
*तिनसुकिया,असम*

Wednesday, April 21, 2021

मेरे राम

गुरू वशिष्ठ की सीख रामकथा का सार है ।
पुरुषोत्तम राम की जनवाणी में छाई आस हैं ।

गुरू शिष्य मान बचाने  रूप बदल आये हैं ।
माया की नगरी में ज्ञान दीप जलाने आये हैं।

दशरथ नंदन राम की नगरी अयोध्या हैं ।
गुरू वशिष्ठ की सीख से पारंगत हो ।

अपने सत्यकर्मो का अधिकार जमाया हैं ।
दर्शन मात्र की अभिलाषा से प्रेम बन छाये हैं ।

 हे अन्तरयामी जनमानस की आस तुम हो ,
पुरुषोत्तम रामकथा की जनवाणी में छाई हैं ।

गुरू शिष्य का अभिमान बचाने रूप बदल आये हो ,
गहन सुरक्षा अन्य जल की भूख मिटाने आये हो ,

शिलालेख कर्मप्रधान जनमानस विश्वास यही हैं ।
जनजागरण आस जगाने मायानगरी में आये हैं ।

कर्मवीर बलवीर केशरीनंदन कलयुग कथा यही हैं ।
अपने पितामह जल दान अर्पण सरयूतट आये हैं ।

 महादेव की भक्ति में राजीव लोचन कहलाये हो 
शान्तचित अनुरागीमन की प्यास बुझाने आये हैं ।
   श्रीमती अनिता शरद झा 


                
       “तुलसी वाणी “

तुलसी भरोसे राम के निर्भय हो के सोय 
ऐसी बाणी बोलिये जन अमृत घुल जाय।

तुलसी राम नाम से जग उजियारा होय
राह चलत जन में प्रेम प्रीत बस जाय।।

तुलसी नाम राम से जग उजियारा होय 
साधक साधना  नियम नीति बन जाय 

राम मन मन्दिर देख ,मन भगत होई जाय 
सोवत जगात प्रेम करत सबरे मन बस जाय।।

सुन्दर स्वर लहरी से ,जगत निहाल हो जाय।
ज्ञान तपस्या पाठ से , काव्य गीत बन जाय।।

कविता शब्दों से ,गुंजित वाह वाह हो जाय।
शब्दों की धरोहर  कविराज के गुण ग़ाय।।

रागों रंग से जुड़ी कविता ,खानपान सब भुल जाय।
घर बाहर के ढंग देख ,अपनी लेखनी में रम जाय।।

प्रेम प्यार में बैर ना हों  ,संगी साथी मीत बन जाय।
मनो मनोरम सूरत देख ,जीवन सफल हो जाय ।।

बूढ़ नही जग में कोई , हँसी ठिठोलि में रम जाय।
 मन का धीरज खोये ना ,मधुर मिलन में लग जाय ।

रास रंग से जुड़ी काया दुःख दर्द भुल जाय।।
काव्य मधुर वाणी से नित्य गीत बन जाय ।

 मोड़ मुस्कानो में साथ साथ मिल जाय।
जहाँ गीत ग़ज़ल कविता साथ हो जाय ।।

तुलसी साथ ना छोड़िये जीवन सुफल हो जाय ।
तुलसी सदाचार राखिए जीवन सुगम हो जाय ।

अनिता शरद झा “आद्या “मुम्बई

हिंददेश परिवार बिहार इकाई ने किया नौ दिवसीय काव्य गोष्ठी का आयोजन।



चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर हिंदी देश परिवार बिहार इकाई में काव्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन 13 से 21 अप्रैल तक चला जिसमें एक से बढ़कर एक कवि और कवयित्रियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी भक्ति रस से संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
बिहार इकाई के प्रदेश अध्यक्ष कुमार नवीन "गौरव", उपाध्यक्ष आनंद प्रकाश एवं प्रदेश सचिव आराधना प्रियदर्शनी ने सभी कवियों को ढेरों बधाइयां एवं शुभकामनाएँ दी । हिंददेश परिवार की संस्थापिका अर्चना पांडे अर्चि एवं अंतर्राष्ट्रीय संरक्षिका स्नेहलता द्विवेदी आर्या ने सभी प्रतिभागियों को "काव्य शक्ति " सम्मान से सम्मानित कर उनकी हौसला अफजाई की। काव्य शक्ति सम्मान पाने वाले रचनाकारों में स्वर्णलता सोन,  प्रज्ञा आंबेरकर,  स्नेहलता द्विवेदी आर्या, सुखमिला अग्रवाल 'भूमिजा',  सुधा चतुर्वेदी 'मधुर',  साधना तिवारी,  दिलीप कुमार झा, विनीता सिंह परिहार, पश्म शुक्ल, आदित्य गुप्त पदयात्री, रूचिका राय,रजनी शर्मा और आराधना प्रियदर्शनी शामिल हैं।
हिन्ददेश परिवार एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है जो रचनाकारों अपनी रचना द्वारा नई नई उपलब्धियां पाने के लिए प्रोत्साहित करता है। उन्हें अलग-अलग सम्मान से विभूषित करके उनका मनोबल बढ़ाता है। समय-समय पर वृक्षारोपण कार्यक्रम एवं रक्तदान शिविर का भी आयोजन करता है।इसके साथ ही हिंददेश परिवार मानव कल्याण हेतु कई सृजनात्मक कार्य भी करता है।

हिंददेश परिवार का अभियान




आओ एक अभियान चलाएँ ,
देश का सम्मान बढ़ाएँ।

अभियान घर से ही चलाएँ,
देश हित कर्म कर जाएँ।

अपने बच्चों को संस्कारी बनाएँ
बड़ों का आदर मान बढ़ाएँ।

बहन -बेटी की इज्ज़त करना सिखाएँ
देश की अस्मिता को बढ़ाएँ।

सादा जीवन उच्च विचार अपनाएँ
हर जगह सम्मान पाएँ।

दिखावें व आडम्बरों को त्याग जाएँ
यथार्थ की धरा पर जी जाएँ।

जीवन के कटु सत्य स्वीकार कर पाएँ
देश में खुशहाली लाएँ।

हर धर्म -जाति का दिल से मान करेंगें 
देश में एकता का बीज बो देंगें।

देश के टुकड़े करने वाले का न साथ देंगे 
देश सेवा परमधर्म ये मानेंगें।

देश के नाम न कालिख लगने देंगें 
प्रयास स्वर्णिम बनने के करेंगें ।

साक्षर बन देश का गौरव बढ़ाएँगें
हमसे पहले देश का नाम लाएँगें ।

हमसे हमारा देश ,यह हम सब जानेंगे ,
इसके सम्मान में अपनी जान लगा दें।

इसी अभियान को आह्वान बनाएँ
मिलकर देश का सम्मान बढ़ाएँ।

नीरजा शर्मा

Tuesday, April 20, 2021

बजरंगी की मुस्कान



लता की नई-नई शादी हुई थी। वह बेहद खुश थी।लेकिन दिन भर उसको अकेले ही रहना पड़ता था। उसके पति सुबह ही काम पर चले जाते थे। और सूरज ढलने पर ही घर लौटकर आते थे। बेचारी नए जगह पर आई लता अकेले रहकर काफी दुखी सी रहने लगी थी। उसके एक -एक दिन एक -एक वर्ष जैसे लगने लगे थे। जब उसके पति काम चले जाते तो हर रोज वह बरामदे में जाकर बैठती। एक व्यक्ति सुबह-सुबह सात बजे के करीब अपने सर पर टोकरी में कुछ लेकर जाता और लता को देखकर एक प्यारी सी मुस्कान देता। लता को बहुत आश्चर्य होता। 

एक दिन वह सोची की इस बात का जिक्र वह अपने पति श्याम से करेगी। रात को खाना खाते समय लता ने शाम से कहा-
अजी आपको कुछ बात बतानी है...
श्याम - तो बोलो न।
लता- हर सुबह एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति सर पर टोकरी में कुछ लेकर सामने वाले रास्ते से गुजरता है और मुझे देखकर मीठी सी स्माइल देता है।
श्याम- ओह, अच्छा। वह तो बजरंगी है जो सामने वाले घर   की गायों का देख -भाल करता है और टोकरी में भरकर गोबर खेत में फेकने जाया करता है। रास्ते में मिलने वाले हर व्यक्ति को एक मीठी मुस्कान देकर स्वागत करता है। इसी अद्भुत मुस्कान की वजह से वह पूरे इलाके में प्रसिद्ध है। सर पर गोबर की टोकरी उठाकर हर वक्त मुस्कराते रहता है। यही उसकी अनोखी पहचान है।
अब लता ने भी सोच लिया कि वह भी हमेशा खुश रहेगी और अपने काम में व्यस्त रहेगी। बजरंगी अगर गोबर की टोकरी सर पर उठाकर हमेशा खुश रहता है और औरों को खुश रखता है तो हमें भी हमेशा खुश रहना चाहिए।

-डॉ. अर्चना पांडेय अर्चि

कैकई के राम


कितना सरल है
कैकेयी के चरित्र को
परिभाषित करना,
स्वार्थी, लालची, पतिहंता
कहना, लांछन लगाना
पुत्रमोही को अपमानित
उपेक्षित करना।
बड़ा सरल सा है ये सब
जो दुनिया को दिखता है,
सारा जग यही तो कहता है।
बस ! नहीं दिखता है तो
कैकेयी का वास्तविक चरित्र
जिसके कारण राम राम से
मर्यादा पुरुषोत्तम राम बन गये।
सारे संसार में,जन जन में
कण कण में बस गये।
कितना मुश्किल रहा होगा वो पल
जब अपने प्राणों से भी प्रिय 
राम को वन गमन कराया,
पति मृत्यु का लाँछन
अपने माथे पर लगवाया।
कोखजाये की उपेक्षा सहना
जनमानस की नजरों में
एकाएक गिर जाना,
परंतु संकल्प, स्वाध्याय से
तनिक भी विचलित न होना
जीते जी मृत्यु सा अहसास करना
एक राजरानी का 
चहुँओर से चलते
जहरीले व्यंग्य बाण सहना
फिर भी न विचलित होना
आसान नहीं था।
बस एक आस, विश्वास था
कौशल्या सुत राम
साक्षात विष्णु का अवतार था,
कौशल्या को कैकेयी पर
अटल विश्वास था,
राम पर कौशल्या से अधिक
कैकेयी का अधिकार था
तभी तो कैकेयी के अंदर
इतना आत्मविश्वास था।
तभी तो माँ की ममता
ममताहीन हो गयी,
अपने सिर पर कलंक ले
दो वचनों की आड़ ले
जिद पर अड़ गई,
कैकेयी ही थी जो राम को
मर्यादा पुर्षोत्तम राम बना गई,
वंश,कुल अयोध्या ही नहीं
सकल जहां को उनका
तारणहार दे गई।
राम के साथ साथ कैकेयी 
खुद को भी अमर कर गई,
राम को सिर्फ राम न रहने दिया
रामनाम का जीवनमंत्र
कण कण में बसा गई,
राम को राजा राम के बजाय
मर्यादा पुर्षोत्तम राम बना गई,
कलंक का बोझ उठाया फिर भी
दुनिया राममय कर गई
अयोध्या को अयोध्या धाम कर गई
जगत में नाम कर गई।
◆ सुधीर श्रीवास्तव
      गोण्डा(उ.प्र.)
    8115285921
©मौलिक, स्वरचित

वंदना राज और समीर मुशा बनें हिंददेश दोहा, कतर पटल के पदाधिकारी, संसार को मिलेगी एक नई दिशा

 वंदना राज बनी दोहा, कतर हिंददेश के अंतरराष्ट्रीय पटल की अध्यक्षा और समीर मुशा उपाध्यक्ष
******************************* दोहा(कतर) इकाई का भव्य उद्घाटन
*****************************
हिंददेश परिवार के बढ़ते कदमों की श्रृंखला में 18/4/2021 को दोहा, कतर नामक एक अंतरराष्ट्रीय पटल का उद्घाटन हुआ। एक सपना जो हिंददेश परिवार ने देखा,उस सकारात्मक्ता और खुशहाली के सोच, चिंतन, विचारधारा को धरातलीय परिदृश्यों पर लाने के क्रम में आज हमारा आपका, हम सबका प्रयास सूदूर में हिंददेश परिवार दोहा, कतर इकाई के रुप में साकार होकर जनमानस के दिलों में स्थापित हो गया । उक्त पटल की अध्यक्षा आदरणीया वंदना राज और उपाध्यक्ष आदरणीय समीर मुशा ने बताया कि वे दोनों हिंददेश परिवार के साथ मिलकर पूरी सृष्टि को खुशहाल बनाने के लिए कार्य करेंगे। साथ ही इस अंतरराष्ट्रीय पटल की संयोजिका आदरणीया इंदु उपाध्याय संचिता ने पूरी सृष्टि को खुशहाल बनाने के लिए अथक परिश्रम कर रही है। आदरणीय इंदु जी अपनी मृदु स्वभाव के कारण पूरे विश्व में लोकप्रिय हो रही है। विश्व को एकता की सूत्र में बाँधने का उनका प्रयास अप्रतिम है। 
         उक्त विचार हिंददेश परिवार की संस्थापिका/ अध्यक्षा डॉ.अर्चना पाण्डेय अर्चि ने 18मार्च '2021को दोहा(कतर) इकाई के आनलाइन उद्घाटन और काव्योत्सव के अवसर पर प्रकट किया।

     डॉ.अर्चि ने कहाअपने वैचारिकी और जुनून की बदौलत हिंददेश परिवार अपनी  सकारात्मक सोच और नम्रता की ताकत से सारे संसार ही नहीं अखिल ब्रह्मांड की वैचारिकी को एकदम अलग वातावरण और चिंतन का संदेश फैलाने का निश्चय किया, उसका असर दिखने ही नहीं महसूस भी होने लगा है।उनके साथ हिंददेश परिवार के हर एक सदस्य नें भी यथासंभव नि:स्वार्थ भाव से अपनी भूमिका अदा की है और लगातार कर भी रहे हैं।अब तक के आप सभी के प्रयासों का ही ये असर है कि परिवार का विस्तार मानविकीय ही नहीं धरातलीय स्तर पर भी साफ दिख रहा है। हर किसी की भूमिका, क्षमता और कार्यप्रणाली भिन्न हो सकती है ,मगर उद्देश्य एक है और हिंददेश परिवार के लगातार हो रहे विस्तार/विकास में सबकी महती भूमिका है।मैं परिवार के हर एक सदस्य को नमन करती हूँ कि आप सब ने हिंददेश को संगठन, संस्था से ऊपर परिवार माना, समझा और उसी तरह अपने को जोड़ा, जिम्मेदारी उठाई। क्योंकि किसी एक दो चार दस के भरोसे ये संभव नहीं हो सकता है।
   मेरा विश्वास है कि समय के साथ कदमताल करते हुए आप सभी के सतत् सहयोग से हिंददेश परिवार का कारवां निर्बाध गतिशील रहेगा और पूरी दुनियां में अपने वैचारिक, सामाजिक और समावेशी चरित्र की छाप अवश्य डालता हुआ बढ़ता रहेगा।
नई इकाई के पदाधिकारियों को बधाइयां और शुमकामनाएँ देते हुए आशा करती हूँ कि नई इकाई लक्ष्य नहीं पड़ाव समझें और स्वयं के साथ इकाई और हिंददेश परिवार के विकास की दिशा में आगे ही बढ़ते/बढ़ाते ही रहें।
       नव मनोनीत इकाई अध्यक्षा (दोहा) आ.वन्दना राज ने हिंददेश परिवार का आभार प्रकट करते हुए अपने संबोधन में कहा कि परिवार के हर एक पदाधिकारी, पारिवारिक सदस्यों को भी बधाइयां और शुभकामनाएं देते हुए विश्वास करती हूँ कि हर एक सदस्य खुद को हिंददेश परिवार को अपना मान इसके उत्तरोत्तर विकास की रूपरेखा से खुद को जोड़कर अपनी जिम्मेदारी निभाने की दिशा में गतिशील रहेगा।
महासचिव आ.बजरंग लाल केजड़ीवाल ने कहा कि हमारा हर कार्य ईश्वर कार्य है,हमारी आवाज ईश्वर की आवाज है और हम सब ईश्वर की संतान है।समूचा संसार एक परिवार है और हम उसकी एक अदद इकाई मात्र हैं।हिंददेश परिवार साहित्य के माध्यम से अपना संदेश संसार भर में फैलाने की दिशा में कृतसंकल्पित है।इसी के साथ हिंददेश पत्रिका, रक्तमंडली का भी सहारा ले रहा है।साथ ही पुष्प वाटिका विद्यालय की भी कार्ययोजना पर भी तेजी से काम कर रहा  है।
     उक्त अवसर पर देश विदेश के कवियों/कवयित्रियों ने अपनी सुंदर, सकारात्मक और खुशहाली फैलाने वाली मोहक रचनाएं प्रस्तुत कीं।
      उक्त अवसर पर आ. महेश कुमार जैन मुदित,स्नेहलता द्घिवेदी, इंदू उपाध्याय, स्मृति त्रिवेदी, कल्पना पारीक,ब्रह्मकुमारी मधुमिता, माधुरी भट्ट मधु,पुष्पा बुकलसरिया, कुमकुम सिन्हा काव्याकृति,प्रियंका अलकनंदिनी, विक्रांत ठाकुर,पल्लवी भुइयां आदि ने भी अपने विचार प्रकट रखे।
  

Saturday, April 17, 2021

माँ एक रूप अनेक



मां एक रूप अनेक, हर रूप का है अलग अलग काम,
नवरात्रि में नौ रूपों वाली माता को, कोटि कोटि प्रणाम।
हर रूप में आदिशक्ति, पाप, अधर्म का विनाश करती,
पुण्य और धर्म के साथ महादेवी, जोड़ती अपना नाम।
मां एक रूप अनेक……………

माता रानी हर रूप में, अपने भक्तों को देती है वरदान,
असुरी शक्तियों को मिटाना जग से, माता की पहचान।
माता रानी हर असंभव को, संभव कर दिया करती, 
हर साल नवरात्रि में देती है, इस जग को नव पैगाम।
मां एक रूप अनेक………….

जो कोई माथा टेकता है, जाकर माता रानी के दरबार में,
वह सब कुछ प्राप्त कर लेता है, जीवन संसार में।
माता रानी अंजाने में हुई, हर गलती माफ कर देती है,
भक्तों को सुनहरी सुबह देती है, और देती सुहानी शाम।
मां एक रूप अनेक………….

माता रानी करती है साधकों पर, हर रूप में मेहरबानी,
भक्तों के जीवन से, मिटा देती है मां हर एक परेशानी।
पाप अधर्म को जीना मुश्किल कर दिया करती भवानी,
पुण्य और धर्म को, इस धरती पर करने देती है आराम।
मां एक रूप अनेक……………

प्रमाणित किया जाता है कि यह रचना स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसका सर्वाधिकार कवि/कलमकार के पास सुरक्षित है।

सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
जयनगर (मधुबनी) बिहार

माता



नवरात्रि का पावन पर्व आया है
 नव निधियां संग ले आया है 
भक्तों के मन को भाया है 
 उल्लास मन में समाया है
नव दुर्गा माता पूजी जाती है
 शक्ति शालिनी जन्म दायिनी लोकपालिनी  माता कहलाती है
उमा रमा ब्रह्माणी माता 
 इस जग की कल्याणी माता
 अन्नपूर्णा बनकर जग  का पेट भरती माता
 नारायणी बनकर संसार चलाती है माता 
आदिशक्ति मातंगी मातभवानी है माता
 भवमोचिनी भव्य शूल धारिणी है माता
 ब्रह्मचारिणी ब्राह्मी ब्रह्मवादिनी है माता
 भद्रकाली कराली कालरात्रि कल्याणी माता
 अग्नि ज्वाला तू महाबाला पिनाक धारिणी हे माता
 सिद्धिदात्री तपस्विनी दानव घातिनी है माता
 चामुंडा चंद्रघंटा चंड मुंड विनाशिनी है माता
 महागौरी शैलपुत्री शक्ति स्वरूपिणी है माता 
कुष्मांडा कात्यायनी और दुख हारणी है माता 
जगदंबे अंबे मात भवानी अष्ट भुजाओं वाली है माता
 काली का अवतार लिए शक्तिशाली है माता
भव पार करो मम कष्ट हरो माता
तुम्हारे जो भी आता खाली हाथ नहीं वो जाता 
सबकी झोली भर्ती है माता
रूप तेरे  है अनेक पर तू तो एक ही है माता।
रमा बहेड हैदराबाद

Friday, April 2, 2021

हिंददेश परिवार ने रचा इतिहास

हिंंददेश परिवार का
अंतरराष्ट्रीय महाकाव्योत्सव संपन्न

साठे सोलह घंटे अनवरत बही काव्यगंगा
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होली के शुभ अवसर पर हिंंददेश परिवार की इकाई हिंंददेश विश्वबंधुत्व द्वारा दिनांक 28 मार्च ' 2021 को अंतरराष्ट्रीय महाकाव्योत्सव भव्यतापूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
       सुबह साठे सात बजे से शुरु उक्त जूम एप जो कि फेसबुक से लाइव हो रहा था। महाकाव्योत्सव रात 12 बजे तक लगातार चलकर देश/विदेश के कवि/कवयित्रियों के संचालन और संरक्षण में बहने वाली काव्यगंगा मील का पत्थर छोड़ गया।
 इस मैराथन महाकाव्योत्सव के लिए पिछले दो माह  से हिंंददेश परिवार अपनी तैयारियों में लगा रहा। जिसके परिणाम स्वरूप अनेक देशों के साथ भारत के कवि/कवयित्रियों ने अपना काव्यात्मक योगदान दिया।
    महाकाव्योत्सव का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुई।आ.माधुरी भट्ट 'मधु'(पटना)और आ.बजरंग लाल केजड़ीवाल 'संतुष्ट' ने सुमधुर स्वर में माँ की आराधना प्रस्तुत की।
      महाकाव्योत्सव की अध्यक्षता हिंंददेश परिवार की संस्थापिका/अध्यक्षा डा.अर्चना पाण्डेय 'अर्चि' ने की।
विश्वबंधुत्व पटल की अध्यक्ष आ0 स्मृति जी जो दोहा कतर की रहने वाली है उन्होंने ऐसा शमा बाँधा कि कवियों के साथ-साथ श्रोताओं ने भी कार्यक्रम का जमकर आनन्द उठाएँ। विशबन्धुत्व पटल की संरक्षिका आ0 कल्पना पारीक जो नॉरोबी केन्या की रहने वाली है उनके उत्साह ने कार्यक्रम में सजीवता ला दी। वही कार्यक्रम की संयोजिका जो पटना हिंदुस्तान की है अनवरत पटल के साथ जुड़ी रही। इन त्रिमूर्तियों की मेहनत और हौसले को कवियों तथा श्रोताओं ने खूब सराहा। और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम करते रहने के लिए गुजारिश की।
अपने अध्यक्षीय भाषण में अध्यक्षा डा.अर्चना पाण्डेय 'अर्चि' जी ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी सदस्यों एवं पदाधिकारियों को बधाइयाँ और शुभकामनाएं दी।अपने सारगर्भित संबोधन में उन्होंने हिंददेश परिवार के बुनियादी उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंददेश परिवार साहित्य के माध्यम से संसार को सुंदर और खुशहाल बनाने को दृढ़ संकल्पित है। इस संसार में जितनी भी प्राकृतिक संपदाएं है,पशु पक्षी, जीव जन्तु, पेड़ पौधे हैं,सभी का उचित प्रयोग हो,मान सम्मान मिले और प्रत्येक मानव एक दूसरे से सहयोग की भावना से मिले और एक दूसरे का मान सम्मान करे। यही हमारे हिंददेश परिवार का मुख्य उद्देश्य है।हम ऐसे समाज का निर्माण करें

108 घण्टे चली देवी की आराधना

*हिंद देश परिवार का 108 घंटे देवी दुर्गा को समर्पित वर्चुअल कार्यक्रम* *देश विदेश के रचनाकारों ने देवी मां के साथ घर की मां की पूजा का किया ...