नवरात्रि का पावन पर्व आया है
नव निधियां संग ले आया है
भक्तों के मन को भाया है
उल्लास मन में समाया है
नव दुर्गा माता पूजी जाती है
शक्ति शालिनी जन्म दायिनी लोकपालिनी माता कहलाती है
उमा रमा ब्रह्माणी माता
इस जग की कल्याणी माता
अन्नपूर्णा बनकर जग का पेट भरती माता
नारायणी बनकर संसार चलाती है माता
आदिशक्ति मातंगी मातभवानी है माता
भवमोचिनी भव्य शूल धारिणी है माता
ब्रह्मचारिणी ब्राह्मी ब्रह्मवादिनी है माता
भद्रकाली कराली कालरात्रि कल्याणी माता
अग्नि ज्वाला तू महाबाला पिनाक धारिणी हे माता
सिद्धिदात्री तपस्विनी दानव घातिनी है माता
चामुंडा चंद्रघंटा चंड मुंड विनाशिनी है माता
महागौरी शैलपुत्री शक्ति स्वरूपिणी है माता
कुष्मांडा कात्यायनी और दुख हारणी है माता
जगदंबे अंबे मात भवानी अष्ट भुजाओं वाली है माता
काली का अवतार लिए शक्तिशाली है माता
भव पार करो मम कष्ट हरो माता
तुम्हारे जो भी आता खाली हाथ नहीं वो जाता
सबकी झोली भर्ती है माता
रूप तेरे है अनेक पर तू तो एक ही है माता।
रमा बहेड हैदराबाद