Saturday, January 30, 2021

सूरज

विषय;- सूरज
दिन;- शुक्रवार
दिनांक;-२९/०१/२०२१

सज ढज के तू पूरब से आता
बारिसों के मौसम में तू अपने
सारे रंग बिखेर ता बादलों को
तू रंगों से इंद्रधनुष से सजता
चमकीले वस्त्र में तू कितना
दमकता सूरज तू कितना प्यारा
अपनी धूप से तू पूरी सृष्टि को 
जगमगा कर तू करता पूरे दिन 
पहरेदारी तेरी धूप से फैल रही 
चारो तरफ हरियाली तेरी लाली 
वाली भोली सूरत लगती सबको
प्यारी हर सुबह वक़्त पर आकर
किरणें फैलाकर तपती धूप से
तू सभी को जगाता शाम होते 
ही तू अपने घर को लौट जाता
तेरे बिनाजीवन अधूरा तू है तो 
जग में उजियारा तू नही तो दिन 
में है अंधेरों का चो तरफ साया

*नीक राजपूत*
*गुजरात*
*9898693535*

Wednesday, January 27, 2021

बेवजह मुस्कराइए

आज का विषय -बेवजह मुस्कुराइएं 
सड़क के किसी मोड़ पर यदि आपको अपना अनजान भी मिल जाती है ।
लगता बेवजह आपको हैं 
तो भी अपनी मधुर मुस्कान के साथ 
मुस्कुराइएं ,
जिसके मतलब से ही कृपा बरस मुस्कान ले आती हैं ।
वह कहती आप से है ?
सपनो को साकार करने हर पल जीती हूँ ।
जिसमें हर पल ख़ुशियों की बारिस होती हैं ।
गुज़ारिश भी यही करती हूँ ।
ना हो गिले शिकवे ना शिकायतें 
सर झटक चल चलने की आदत बनाइये ।
अपनी मधुर मुस्कान के साथ 
 मुस्कुराईएं ।
हर मोड़ पर उसका साथ मिल जायेगा 
उस मोड़ पर हमारे अपनो का साथ 
होगा । 
उस मोड़ पर कविताओं लघुकथाओं ज़स्बा साथ होगा ।
किसी ने स्नेह बरसाया ।
किसी ने प्रेम बरसाया ।
हम उसी के हो कर रह गये ,
जिसने हर वक़्त साथ निभाया ।
गुजरे दिनो की अच्छी बातें ले आगे बढ़ जायेंगे ।
हम तो हर हाल में अपनो को अपना बना जायेंगे ।
नयेवर्ष नयेदिन का स्वागत ख़ुशियों से सजायेंगे।
गुजरे दिनो की अच्छी बातें ले आगे बढ़ जायेंगे ।
हम तो हर हाल में अपनो को अपना बना जायेंगे।
नयेवर्ष नयेदिन का स्वागत ख़ुशियों से भर जायेंगे ।
कर्म इंसानियत की जीत होती है ।
इससे बड़ा क़ोई धन नही होता है ।
पापपुण्य कर्मों का लेखा जोखहोता है 
विद्या ज्यों ज्यों खर्चे त्यों त्यों बढ़े ।
सुबह की धूप सुहानी होती है 
 नज़ारों में क़ैद बहार होती हैं 
पल पल जीने एहसास होती हैं 
अंधेरा दूर भगा रोशनी होती हैं
मुस्कान आत्मीयता की चाहत 
परमात्मा की अमूल्य भेंट है 
जिसे लेने देने की अमिट चाहत ।
बेक़रारी बेख्याली की चाहत हैं 
चाहत मंज़िल का रास्ता होती हैं 
ग़मों को पीछे छोड़ आगे बढ़ जाती हैं 
भाग्य लकीरों को खींच आगे बढ़ा जाती हैं ।
उम्मीदों के साथ रास्ता बढ़ा जाती हैं
धर्य सफलता मधुर रिश्तों की अनमोल कुँज़ी है ।
जीवन को सुखमय बनाना सफलता की कुँज़ी है ।
 हर दिन नये आयाम विश्वास के साथ आगे बढ़ जाइएगा ।
आने वाला कल समय संस्कारों की पूँजी है।
हम तो हर हाल में अपनो को अपना बना जायेंगे 
धन्यवाद
अनिता शरद झा रायपुर

मज़दूर

🌹🌹 मजदूरों को समर्पित मेरी रचना जो लॉकडाउन में लिखी थी..........

अभी चुनाव करवा दो बस खुद चल के आयेगी,
इन मजदूरों को ले के जाएगी,
मुफ़्त में खाना खिलाएगी,
जरा पूछे इन्हे कोई की ये होना जरूरी है,
क्या मजदूरों के लिए कुछ भी फ्री नहीं है।।
चले जाते है वो ऐसे की बस चलना जरूरी है,
कहीं रुक जाते है यूही की बस रुकना जरूरी है,
ना बिस्तर है ना माचा है ना कोई इनके ए. सी. है,
क्या मजदूरों के लिए..................
सरकार कहती है कि खाना हम ही देते है,
स्कूल, आश्रम में इनको रोक लेते है,
जरा पूछे इन्हे कोई की कभी ऐसा होता है,
थाली में पूरी चार होती है सब्ज़ी भी थोड़ी है,
क्या मजदूरों के लिए............
कोई दिल्ली से आता है कोई यू. पी. को जाता है,
पर ना कोई इन्हे पूछने वाला ना पता बताने वाला है,
चले जा रहे बस यूंही की जैसे भगवान मालिक है,
क्या मजदूरों के लिए...........
पांवों में छाले है हाथों में थैले है,
गोदी में बिटिया है और मां को संग लेते है,
क्या ये वही देश है जहां ये और हम ही रहते है,
क्या मजदूरों के लिए......
सरकार चाहती है हमें वोट मिल जाए,
ये बस हमें वोट दे जाए फिर चाहे सड़क पे मर जाए,
क्या मजदूर का जीवन इतना सस्ता है,
की नेता पेट भर जाए और मजदूर भूखा सो जाए,
बस आला कमान से यही पूछना है, कि मजदूरों के लिए............
 
नगेन्द्र बाला बारेठ
हाल निवासी दिल्ली

ज्योति सिन्हा को मिला सम्मान

ज्योति सिन्हा को कलिंग कोविद औरकलावंत सहित कई सम्मान *****************************
मुजफ्फरपुर( बिहार):जनपद की यशस्वी कवियित्री,साहित्य संगम संस्थान बिहार इकाई की उपाध्यक्ष,बोली विकास मंच का सह संयोजक और बिहार इकाई की पत्रिका (नववर्ष से उम्मीदें)की सम्पादिका श्रीमती ज्योति सिन्हा को उड़ीसा इकाई के उद्घाटन के अवसर पर दिनांक 26.01.2021 को इकाई द्वारा 'उत्कल उत्कर्ष','कलिंग कोविद', मुख्य मंच द्वारा 'परिचर्चा प्रवीण' और अलंकरण शाला द्वारा 'कलावंत सम्मान' से सम्मानित किया गया है।
   बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी 
श्रीमती सिन्हा को अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। हाल में ही 6 जनवरी '21 को उनके एकल काव्य संग्रह का विमोचन संस्थान के सह अध्यक्ष के कर कमलों द्वारा हो चुका है।श्रीमती सिन्हा को इसके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश इकाई द्वारा 'वागीश्वरी' और 'वीणा पाणि',उत्कृष्ट अलंकरणों के लिए 'अलंकरण सरताज',के साथ ही राजस्थान इकाई द्वारा 'सुर साधक',सम्मान के अलावा अब तक साहित्य संगम संस्थान द्वारा 'उषा किरण' और 'काव्य ज्योति',असम इकाई द्वारा 'असम साहित्य रत्न',दिल्ली इकाई द्वारा 'दिल्ली दंगल',बिहार इकाई द्वारा 'काव्य प्रभाकर', 'साहित्य प्रहरी', 'भक्त शिरोमणि', उत्तर प्रदेश इकाई द्वारा 'आदर्श सहयात्री',गुजरात इकाई द्वारा 'नागरी उन्नयन' और 'काव्य सारथी', वाह वाह क्या बात है द्वारा 'काव्य रत्न',पंजाब इकाई द्वारा 'गुरु गोविंद',पश्चिम बंगाल इकाई द्वारा ' बंगाल विभूति', 'मेरी कलम मेरी पूजा' द्वारा 'साहित्य गौरव',साहित्य रेखा द्वारा 'सिल्वर अवार्ड' और कलम बोलती है द्वारा 'सारथी' और 'साहित्य मणि'सम्मान सहित अनेकों साहित्यिक/सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
        श्रीमती सिन्हा को एक साथ कई सम्मान मिलने पर परिवार,मित्रों और शुभचिंतकों में खुशी है।इसके अलावा साहित्य संगम संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष आ.राजवीर सिंह मंत्र, आ.रोहित रोज,आ.मिथिलेश सिंह मिलिंद,आ.तरुण राज सक्षम अंतरराष्ट्रीय कवि डा.राकेश सक्सेना, आ.विनोद वर्मा,आ.छाया सक्सेना, आ.स्नेह लता द्विवेदी, आ.कलावती करवा,आ.सुखमिला अग्रवाल,आ.रंजना बिनानी, आ.रीता झा,आ.रजनी हरीश,आ.रतन कुमार शर्मा, आ.इंदु शर्मा 'शचि', आ.उमा वैष्णव,आ.बजरंग लाल केजड़ीवाल, वरिष्ठ पत्रकार/कवि आ.अमित कुमार बिजनौरी, हिंददेश परिवार की संस्थापिका/अध्यक्षा आ.अर्चना पाण्डेय 'अर्चि',उ.प्र.अध्यक्षा आ.रुबी गुप्ता, साहित्यिक आस्था परिवार के रा.उपाध्यक्ष आ.सुधीर श्रीवास्तव, आ.अंकुर सिंह, आ.अभिषेक मिश्रा, आ.आभा सिंह, आ.महेंद्र सिंह, महेंद्र कुमार मद्धेशिया के अलावा रा.कायस्थ एकता मंच के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, उ.प्र.सचिव आ.राजेश चंद्र श्रीवास्तव,मध्यप्रदेश उपाध्यक्ष/वरिष्ठ साहित्यकार आ.संजय श्रीवास्तव, बहराइच की महिला अध्यक्षा आ.रीता श्रीवास्तव, बलरामपुर अध्यक्ष आ.रमेश चंद्र श्रीवास्तव, चित्रगुप्त  धाम सेवा ट्रस्ट के रा.अध्यक्ष आ.अनुराग श्रीवास्तव, रा.संगठन सचिव आ.विवेक मणी श्रीवास्तव सहित अनेक सामाजिक, साहित्यिक संगठनों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई और शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य का विश्वास भी व्यक्त किया।
     ग्रामीण परिवेशी श्रीमती सिन्हा ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बचपन से ही उन्हें लेखन का शौक था, धीरे धीरे ये शौक कब जुनून में बदल गया पता ही न चला।निरंतर साहित्य साधना और हिंदी विकास के प्रति समर्पित आ.सिन्हा का कहना है कि परिवार/समाज और अपने जूनून के बीच तालमेल बिठाना बहुत कठिन है।परंतु परिवार,शुभचिंतकों और सहयोगियों के सहयोग से ही ये सब संभव हो पा रहा।ये मेरे लिए सूकून देने वाला है।

साहित्य संगम की उड़ीसा इकाई का हुआ भव्य उद्घाटन

देश के 74वें गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर साहित्य संगम संस्थान ने स्थापित की अपनी सोलहवीं राज्य इकाई : उड़ीसा 

राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी मिथलेश सिंह मिलिंद नई दिल्ली : 

आज के कार्यक्रम में भव्य छंदोत्सव/गणतंत्रोत्सव का आयोजन, नौ पुस्तकों का विमोचन, मनोनयन, सम्मान वितरण व इकाई का उद्धाटन समारोह बहुत ही भव्य तरीके से हुआ सम्पन्न, जिसमें देश के विविध प्रांतों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, हिमाचल, उड़ीसा और अन्य कई राज्यों से करीब सौ नामचीन व नवोदित साहित्यकारों ने भाग लिया जो वाकई में नायाब रहा। 

साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली के तत्वावधान में संस्थान की उड़ीसा इकाई का उद्घाटन समारोह आज गणतंत्र दिवस के पावन पर्व 26 जनवरी 2021 को सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक भव्य आनलाइन छंदोत्सव के रूप में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार संगम सवेरा के प्रधान संपादक आ. नवलकिशोर सिंह जी द्वारा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आ. डॉ राकेश सक्सेना जी, विशिष्ट अतिथि आ. कुसुम लता कुसुम जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष आ. राजवीर सिंह मंत्र जी, सह अध्यक्ष आ कुमार रोहित रोज़ जी, कार्यक्रम का संचालन व संयोजन "नई उमंग समिति" के अंतर्गत रोहित कुमार रोज़, मिथलेश सिंह मिलिंद, विनोद वर्मा दुर्गेश जी, अर्चना पाण्डेय जी, वंदना नामदेव जी, अर्चना तिवारी जी, ज्योति सिन्हा जी, जयश्रीकांत जी, सुनीता जौहरी जी, भारती यादव जी द्वारा बखूबी अंजाम दिया गया। संस्थान की उड़ीसा इकाई उद्घाटन समारोह में देश के विभिन्न प्रांतों से लगभग सौ ज्येष्ठ-श्रेष्ठ कवियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने मनमोहक छंद बद्ध काव्यपाठ से समारोह को ऐतिहासिक व यादगार बना दिया और संस्थान के द्वारा हिंदी साहित्य के विकास में सहयोगी हर एक ऐतिहासिक कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए, संस्थान को ढेरों बधाइयाँ भी दी।  कार्यक्रम की सफलतम समाप्ति के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय राजवीर सिंह मंत्र जी ने कार्यक्रम में शामिल सभी कवियों को हार्दिक धन्यवाद कहते हुए, सभी शायरों/कवियों को "उत्कल उत्कर्ष" की उपाधि से विभूषित किया। इस कार्यक्रम में एक साथ संस्थान की नौ पुस्तकों का विमोचन किया गया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक कीर्तिमान है, जो अब तक की साहित्य मीडिया जगत में सबसे बड़ी व अहम उपलब्धि है। कार्यक्रम में प्रस्तुत छंद बद्ध रचनाओं को संकलित कर छंदमेध पुस्तक बनाने की पहल भी साहित्यिक दृष्टिकोण से कल्याणकारी व शिक्षाप्रद है। संस्थान द्वारा अब तक पांच उत्कृष्ट कोटि की छंदमेध पुस्तकों का विमोचन किया जा चुका है, जो साहित्यिक, सामाजिक व सांस्कृतिक सभी दृष्टियों से कल्याणकारी भाव प्रेषित करने में पूर्ण सहयोगी होगी, ऐसा पूर्ण विश्वास है।

मतदान कीजिए

       

भारत के जागरुक गण,
वरदान दीजिए ।
अधिकार मत का पाके ,
मतदान कीजिए । 
हो दूर धर्म , भा षा ,
जाति विशेष से ।
आना ना प्रलोभन में,
समुदाय द्वेष से ।।
मर्यादा लोकतंत्र-ए ,
अहसान कीजिए ।
अधिकार मत का पाके,
मतदान कीजिए ।।
निष्पक्ष रहके अक्षुण्ण,
शान्ति का प्रण करें ।
कायम हो आस्था भी,
शुभता का जप करें ।।
मतदान -यज्ञ पूरक,
अभय दान दीजिए ।
अधिकार मत का पाके,
मतदान कीजिए ।।
रखना है ध्यान मन में,
भारत सशक्त हो ।
मतदाता नहीं छूटे कोई,
जो राष्ट्र-भक्त हो ।।
कर्तव्य श्रेष्ठता ही "अनुज",
प्रण मान लीजिए ।
अधिकार मत का पाके ,
मतदान कीजिए ।।
डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज"
अलीगढ़ , (उत्तर प्रदेश) ।

गणतंत्र दिवस के मौके पर हिंददेश रक्तमण्डली पर हुआ भव्य कवि सम्मेलन

हिंददेश रक्तमंडली का 
गणतंत्र दिवस पर भव्य कवि सम्मेलन
*****************************
तिनसुकिया(असम): हिंददेश परिवार की हिंददेश रक्तमंडली ग्रुप द्वारा 72 वें गणतंत्र दिवस के असर पर भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन 26 .01.2021 को संपन्न हुआ।
    हिंददेश परिवार के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी/हिंददेश रक्तमंडली संयोजक श्री सुधीर श्रीवास्तव के संयोजकत्व में इस कार्यक्रम की शुरूआत दिल्ली इकाई प्रभारी आ.कविता बबली पाल द्वारा माँ सरस्वती के पूजन अर्चन से हुई।परिवार के महासचिव और कवि/साहित्य कार आ.बजरंग लाल  केजड़ीवाल जी ने सरस्वती वंदना से मन मोह लिया।
    कार्यक्रम प्रभारी आ.अमित कुमार बिजनौरी जी ने सभी अतिथियों /कवियों का स्वागत /अभिनंदन कर आज के कवि सम्मेलन हेतु  अनन्त  शुभकामनायें  दी। 
         परिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्या और अनुशासन प्रमुख आ.पुष्पा बुकलसरिया प्रीत ने अपनी अभिव्यक्ति में हिन्ददेश रक्तमंडली के उद्देश्य को उजागर किया और कहा कि सम्पूर्ण विश्व में संवेदनाओं का  संचार करना और जगत के  कल्याण के लिए अपने सद्कर्मो सद्व्यहारों ,सहयोग की भावना जागृति करने और हर किसी के प्रति संवेदनशील होने की अपील भी की। 
         कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंददेश परिवार की संस्थापिका/अध्यक्षा आ.अर्चना पाण्डेय 'अर्चि'ने किया। 
      कार्यक्रम में देश भर के लगभग 60 से अधिक कवियों/कवित्रियों ने रक्तदान और देशप्रेम से सजी खूबसूरत रचनाओं से पूरे आयोजन को उल्लासमय बना दिया।
कार्यक्रम में हिंददेश परिवार/पत्रिकाऔर इकाई पदाधिकारियों की गरिमामय उपस्थित अंत तक बनी रही।जिनमें श्रीमती कविता पाल बबली,डॉ हेरम्ब कुमार मिश्र,आ.रुबी गुप्ता , श्रीमती पुष्पा बुकलसरिया प्रीत,श्रीमती ज्योति सिन्हा,आ.अभिषेक मिश्रा, आ.अमित कुमार बिजनौरी,आ.संतोष अड़पावार सत्य, आ.बजरंग केजड़ीवाल 'संतुष्ट',आ.राहुल कुमार दास ,कुमारी मुस्कान वर्मा 'स्नेहा', आ.अभिषेक शर्मा आदि  हैं।
    अपने अध्यक्षीय भाषण में अध्यक्षा आ.अर्चना जी ने कार्यक्रम की सफलता के लिए इकाई पदाधिकारियों को बधाइयाँ और शुभकामनाएं दी और संयोजक आ. सुधीर श्रीवास्तव को विशेष रुप से उनकी संवेदनशीलता के लिये धन्यवाद दिया और कहा कि श्री श्रीवास्तव ने संयोजन में रक्तमंडली निश्चित ही अपने उद्देश्यों में सफल होगी बल्कि रक्त के हर जरूरत मंद तक अपनी सहभागिता सुनिश्चित भी करेगी।तत्पश्चात अपने सारगर्भित संबोधन में उन्होंने हिंददेश परिवार के बुनियादी उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंददेश परिवार साहित्य के माध्यम से संसार को सुंदर और खुशहाल बनाने को दृढ़ संकल्पित है।इस संसार में जितनी भी प्राकृतिक संपदाएं है,पशु पक्षी, जीव जन्तु, पेड़ पौधे हैं,सभी का उचित प्रयोग हो,मान सम्मान मिले और प्रत्येक मानव एक दूसरे से सहयोग की भावना से मिले और एक दूसरे का मान सम्मान करे।यही हमारे हिंददेश परिवार का मुख्य उद्देश्य है।हम ऐसे समाज का निर्माण करें जहां सबमें एक दूसरे के लिये प्रेम ही प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना हो। जब हम कोई भी अच्छा काम करते हैं,तब सारी सृष्टि हमारे साथ होती है।
    उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से संदेश देते हुए कहा 'तुम चलो तो सही साथ में है गगन,तुम चलो तो सही साथ में है पवन,अब तो धरती तेरी, है तेरा आसमां,संग संग चल पड़ेगा तेरे सारा जहां। उन्होंने उम्मीद जताई की हम निश्चित ही संसार को सुंदर बनाने में जरूर सफल होंगे, क्योंकि आप हमारे और हिंददेश परिवार के साथ हैं।
             अनुशासन प्रमुख आ.पुष्पा बुकलसरिया प्रीत ने अनुशासन की सीख के साथ अपना आशीर्वाद भी दिया।
    राष्ट्रीय महासचिव आ.बजरंग लाल केजड़ीवाल संतुष्ट जी ने सफल आयोजन के लिए सभी को धन्यवाद दिया और विश्वास व्यक्त किया कि इकाई नये मानदंड स्थापित करने में जरूर सफल होगी।इसी के साथ उन्होंने कार्यक्रम के समापन की औपचारिक घोषणा भी की।
   अंत में आज के कार्यकम प्रभारी आ.अमित कुमार बिजनौरी जी ने शीर्ष नेतृत्व की सहमति से सभी कवियों को सम्मानित करने की घोषणा करते हुए राष्ट्रीय, प्रांतीय पदाधिकारियों के प्रति उचित मार्गदर्शन/विश्वास के लिए और सभी कवियों के सहयोग/उपस्थिति के लिए धन्यवाद /आभार प्रकट किया और विश्वास दिलाया कि शीर्ष नेतृत्व हिंददेश रक्तमंडली ग्रुप के साथ हमेशा खड़ा है और आगे भी रहेगा।

रक्तमण्डली दुनिया को रक्तदान की महत्ता समझा रही है।

हिंददेश रक्तमंडली का 
गणतंत्र दिवस पर भव्य कवि सम्मेलन
*****************************
तिनसुकिया(असम): हिंददेश परिवार की हिंददेश रक्तमंडली ग्रुप द्वारा 72 वें गणतंत्र दिवस के असर पर भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन 26 .01.2021 को संपन्न हुआ।
    हिंददेश परिवार के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी/हिंददेश रक्तमंडली संयोजक श्री सुधीर श्रीवास्तव के संयोजकत्व में इस कार्यक्रम की शुरूआत दिल्ली इकाई प्रभारी आ.कविता बबली पाल द्वारा माँ सरस्वती के पूजन अर्चन से हुई।परिवार के महासचिव और कवि/साहित्य कार आ.बजरंग लाल  केजड़ीवाल जी ने सरस्वती वंदना से मन मोह लिया।
    कार्यक्रम प्रभारी आ.अमित कुमार बिजनौरी जी ने सभी अतिथियों /कवियों का स्वागत /अभिनंदन कर आज के कवि सम्मेलन हेतु  अनन्त  शुभकामनायें  दी। 
         परिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्या और अनुशासन प्रमुख आ.पुष्पा बुकलसरिया प्रीत ने अपनी अभिव्यक्ति में हिन्ददेश रक्तमंडली के उद्देश्य को उजागर किया और कहा कि सम्पूर्ण विश्व में संवेदनाओं का  संचार करना और जगत के  कल्याण के लिए अपने सद्कर्मो सद्व्यहारों ,सहयोग की भावना जागृति करने और हर किसी के प्रति संवेदनशील होने की अपील भी की। 
         कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंददेश परिवार की संस्थापिका/अध्यक्षा आ.अर्चना पाण्डेय 'अर्चि'ने किया। 
      कार्यक्रम में देश भर के लगभग 60 से अधिक कवियों/कवित्रियों ने रक्तदान और देशप्रेम से सजी खूबसूरत रचनाओं से पूरे आयोजन को उल्लासमय बना दिया।
कार्यक्रम में हिंददेश परिवार/पत्रिकाऔर इकाई पदाधिकारियों की गरिमामय उपस्थित अंत तक बनी रही।जिनमें श्रीमती कविता पाल बबली,डॉ हेरम्ब कुमार मिश्र,आ.रुबी गुप्ता , श्रीमती पुष्पा बुकलसरिया प्रीत,श्रीमती ज्योति सिन्हा,आ.अभिषेक मिश्रा, आ.अमित कुमार बिजनौरी,आ.संतोष अड़पावार सत्य, आ.बजरंग केजड़ीवाल 'संतुष्ट',आ.राहुल कुमार दास ,कुमारी मुस्कान वर्मा 'स्नेहा', आ.अभिषेक शर्मा आदि  हैं।
    अपने अध्यक्षीय भाषण में अध्यक्षा आ.अर्चना जी ने कार्यक्रम की सफलता के लिए इकाई पदाधिकारियों को बधाइयाँ और शुभकामनाएं दी और संयोजक आ. सुधीर श्रीवास्तव को विशेष रुप से उनकी संवेदनशीलता के लिये धन्यवाद दिया और कहा कि श्री श्रीवास्तव ने संयोजन में रक्तमंडली निश्चित ही अपने उद्देश्यों में सफल होगी बल्कि रक्त के हर जरूरत मंद तक अपनी सहभागिता सुनिश्चित भी करेगी।तत्पश्चात अपने सारगर्भित संबोधन में उन्होंने हिंददेश परिवार के बुनियादी उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंददेश परिवार साहित्य के माध्यम से संसार को सुंदर और खुशहाल बनाने को दृढ़ संकल्पित है।इस संसार में जितनी भी प्राकृतिक संपदाएं है,पशु पक्षी, जीव जन्तु, पेड़ पौधे हैं,सभी का उचित प्रयोग हो,मान सम्मान मिले और प्रत्येक मानव एक दूसरे से सहयोग की भावना से मिले और एक दूसरे का मान सम्मान करे।यही हमारे हिंददेश परिवार का मुख्य उद्देश्य है।हम ऐसे समाज का निर्माण करें जहां सबमें एक दूसरे के लिये प्रेम ही प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना हो। जब हम कोई भी अच्छा काम करते हैं,तब सारी सृष्टि हमारे साथ होती है।
    उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से संदेश देते हुए कहा 'तुम चलो तो सही साथ में है गगन,तुम चलो तो सही साथ में है पवन,अब तो धरती तेरी, है तेरा आसमां,संग संग चल पड़ेगा तेरे सारा जहां। उन्होंने उम्मीद जताई की हम निश्चित ही संसार को सुंदर बनाने में जरूर सफल होंगे, क्योंकि आप हमारे और हिंददेश परिवार के साथ हैं।
             अनुशासन प्रमुख आ.पुष्पा बुकलसरिया प्रीत ने अनुशासन की सीख के साथ अपना आशीर्वाद भी दिया।
    राष्ट्रीय महासचिव आ.बजरंग लाल केजड़ीवाल संतुष्ट जी ने सफल आयोजन के लिए सभी को धन्यवाद दिया और विश्वास व्यक्त किया कि इकाई नये मानदंड स्थापित करने में जरूर सफल होगी।इसी के साथ उन्होंने कार्यक्रम के समापन की औपचारिक घोषणा भी की।
   अंत में आज के कार्यकम प्रभारी आ.अमित कुमार बिजनौरी जी ने शीर्ष नेतृत्व की सहमति से सभी कवियों को सम्मानित करने की घोषणा करते हुए राष्ट्रीय, प्रांतीय पदाधिकारियों के प्रति उचित मार्गदर्शन/विश्वास के लिए और सभी कवियों के सहयोग/उपस्थिति के लिए धन्यवाद /आभार प्रकट किया और विश्वास दिलाया कि शीर्ष नेतृत्व हिंददेश रक्तमंडली ग्रुप के साथ हमेशा खड़ा है और आगे भी रहेगा।

जीवन के दिन बड़े सुहाने

जीवन के दिन बड़े सुहाने


बड़े सुहाने जीवन के दिन....
जब
बहाते हैं दिन रात पसीना लहू संग,
पुरूष मेहनत कर जीते कशमकश 
संग ।
वेदना को दिल में ही छुपाते जीते
मुस्कुराहट के संग ।
फँस जाते रिश्तों के भँवर में पत्नी
तो कभी माँ के संग,।
मीठी बोली बोल माता-पिता कभी
भाई-बहन ,सब परिवार संग।
सबको सफ़ल बनाने में टूटते बिखरते
कभी न छोड़ते धैर्य का संग..।
माँ का लाड़ला बेटा, बहन का प्यारा 
भी पत्नी का निभाते कर्तब्य हरदम  ।
खुद जिम्मेदारियों के बोझ से 
थककर भी,
हर पथ पर ये सबकी रक्षा करते हैं । 
कभी बच्चों के मुख से प्यारे पापा
सुन,
खुद को सफल समझ लेते हैं ख़ुश 
हो लेते हैं। 
देने को उनका भविष्य उज्जवल,
कड़ी कितनी मेहनत करते हैं । 
बच्चों को ऊंचा उठाने को,खुद 
नीचे ही झुक जाते हैं।
घर चलाने की जुगत में,आधी नींद
ही सोते हैं। 
ये आँखों से तो कम ही मगर,दिल 
से नम रहते हैं ।
मीठी वाणी से ये बिगड़ा काम बना
लेते हैं 
जीवन में कशमकश फ़िर भी ये ख़ुश 
रहते हैं मुस्काते हैं....!
सबकुछ छुपा लेते हैं..
जीने के चार दिन...!
क्योंकि बड़े सुहाने हैं जीवन के दिन...!
इन्दु उपाध्याय संचिता

जीवन के दिन बड़े सुहाने

बड़े  सुहाने है जीवन के दिन

 बड़े सुहानी है जीवन के दिन,
 निर्भर करता है हमारी सोच पर।

 जैसा हम सोचेंगे वैसा ही हम पाएंँगे 
संतुष्ट रह जीवन अपना बिताएँगे ।

बिना मेहनत आगे बढ़ पाना मुश्किल,
सोच को सकारात्मक रखकर ही मुमकिन।

 खुद पर विश्वास कर आगे बढ़ो ,
 मुझे लगता है दिन सुहाने ही होंगे।

 समय कभी एक सा नहीं रहता
 दुख है तो सुख आ ही जाता है ।

 बात मन को समझाने की होती है 
अपनी चादर से बाहर पैर न फैलाओ।

  जो प्राप्त है, वह पर्याप्त है,
 मानकर चलें तो सुख ही सुख है।

इतने में हमें काम चलाना है, करना है,
 कोई भी कष्ट होने की उम्मीद ही नहीं है।

  मेहनत खुद की गर करें विश्वास ,
सुहाने दिनों की रहेगी सदा आस ।

सकारात्मक सोच से सब पाया जा सकता,
श्रम करने वालों की कभी हार नहीं होती। 

मुसीबतों को जो पार कर जाता है 
सफलता उसके कदम चूमती है।

 अपनी अतृप्त इच्छाओं को और न बढ़ाओ,
 जो है उसमें संतुष्ट रहना सीख जाओ।

जीवन में दिन हमेशा सुहाने आएँगे 
स्वर्ग का सुख यहीं पा जाएँगे।

सोच अगर हो जाएगी सकारात्मक
 इच्छाएँ अपने आप हो जाएँगी संयत।

 अपने जीवन को नियमित,लगन से बनाते हैं, वह हमेशा खुशियाँ ही पाते हैं।

 अपनी मेहनत से पाई हर चीज मीठी होती है,
मेहनत का पसीना व गाढ़ी कमाई मिली होती है।

दूसरों ने क्या पाया,क्यों पाया,कितना पाया?
अगर सोचते रहे तो जिंदगी पतझड़ है ।

 दोस्तों जिंदगी बहुत खूबसूरत है,
 दिल से जियो, जितना है उसमें खुश रहो।

अपनी क्षमता के अनुसार खूब मेहनत करो, 
 जीवन में आगे बढ़ते जाओ ।

सच कहूँ , जीवन सुहाना हो जाएगा,
हर दिन मनभावना बन जाएगा ।

नीरजा शर्मा
चंडीगढ़

जीवन के दिन बड़े सुहाने

नमन मंच

बड़े सुहाने हैं ये दिन

नाचें गाएँ और ख़ुशियाँ मनाएँ।
भूलकर सारा ग़म मुस्कुराएँ।

हवाएँ बिखेरेगीं दुनिया में सारी।
खुशबू के हम जो फूल खिलाएँ।ब

आँसू हमारी जो आँखों मेंछलकें।
बनकर शबनम हम बिखराएँ।

रोशनी की कहीं पर कमी न रहे।
दीपक बनकर ख़ुद को जलाएँ।

जीवन ही बन जाये सरगम
गीत बनें और ख़ुद को गाएँ।

हम बसंत ही बन सकते हैं।
पतझर चाहे कितने आएँ।

डॉ किरण जैन

तिरंगा


तिरंगा है मेरी जान,
कहलाता देश का शान।
तीन रंगों से बना तिरंगा,
बढ़ता देश का स्वाभिमान।।

तिरंगे का केसरिया साहस देता,
मध्य श्वेत रंग शांति दिखलाता।
हरा रंग विकास को बतलाता,
तीन रंगों का मेल तिरंगा कहलाता।।

तिरंगे में बना चक्र हमको,
चौबीस घंटे चलना सिखाता।
पंद्रह अगस्त को लाल किले पर, 
छब्बीस जनवरी को राजपथ पर,
लहर तिरंगा हमारी शान दिखाता ।।

यारों तिरंगा है हमारी जान,
रखेंगे हम सब इसका मान।
तिरंगे की रक्षा के खातिर,
कर देंगे अपने प्राण कुर्बान।।

आओ हमसब मिलकर गाएं,
जन गण मन वाला राष्ट्र गान।।
आपस में जाति-धर्म का मिटाए,
तभी बनेगा हमारा देश महान।।

*अंकुर सिंह*
चंदवक जौनपुर
उत्तर प्रदेश -222129

Tuesday, January 26, 2021

रिश्ते नाते

क्यों 
छुप के देखते हैं,
लोग 
आज कल, 
दास्तान अपनी... क्यों?
खो देने पर तुले हैं 
पहचान अपनी...।
चलो माना
उनके पास है 
वक्त की 
बहुत ज्यादा कमी,
पर 
कभी देखी ही नहीं
हाव-भाव में,
आँखों में
इस बात का अफसोस 
या नमी ।
आज के इस 
मायूसी भरे माहौल में 
हर रिश्ता 
दम तोड़ने पर तुला है,
हर रिश्ते को चाहिए
बस थोड़ा सा 
अपनों का समय।
अब 
कौन याद दिलाये?
किए हुए वादे,
दिखाए हुए सपने,
बहुत करीबी होते हैं 
अपनों से भी 
ज्यादा अपने होते हैं।
फिर क्यों ?
तोड़ दिए जाते हैं,
अपनों के हाथों
अपनों के ही सपने
क्यों ?
खून के आंसू रुलाते हैं।
पल में सगे 
और 
पल में दुश्मन बन जाते हैं,
प्यार से प्यारे 
रिश्ते को भी 
लोग
निभा नहीं पाते हैं।
@ज्योति सिन्हा
   मुजफ्फरपुर, बिहार

संसार दे दो माँ


बेटी हूँ आपकी मैं,
उपहार दे दो माँ ।
मुझे गर्भ में ना मारो,
संसार दे दो माँ ।।
सम्मान बनूँगी माँ,
तेरा अभिमान भी ।
सौभाग्य बनूँगी माँ,
तेरा अरमान भी ।।
कुदरत का पुष्प हूँ,
अधिकार दे दो माँ ।
मुझे गर्भ में ना मारो,
संसार दे दो माँ ।।
मेहनत लगन के बल पर,
राह आसां करूँ ।
दामन को थाम तेरा,
रोशन जहां करूँ ।।
आँगन में खिल-खिलाऊँ,
कुछ प्यार दे दो माँ ।
मुझे गर्भ में ना मारो,
संसार दे दो माँ ।।
जननी हो समझ हो,
ना करूँ अवमानना ।
हर बात तेरी मानूँ,
मेरी सुन लो प्रार्थना।।
सौगात बन के गाऊँ,
"अनुज"दीदार दे दो माँ।
मुझे गर्भ में ना मारो,
संसार दे दो माँ ।।
डॉ अनुज कुमार चौहान"अनुज"
अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश )

लुइतपुरिया स्वर्ण शाखा का हुआ पुर्नगठन

*डिब्रुगढ़ में लुइतपोरिया स्वर्ण शाखा साहित्य सभा की तृतीय वार्षिक सभा आयोजित..*

*पुष्पा बुकलसरिया पुनः बनी अध्यक्ष , सुरेश अग्रवाल सम्भालेंगे सचिव की कमान..*

*सन्दीप अग्रवाल*

*असम साहित्य सभा की स्वर्णिम शाखा लुइतपोरिया स्वर्ण शाखा साहित्य सभा , डिब्रुगढ़ की तृतीय वार्षिक साधारण सभा का आयोजन दिनांक २४/०१/२०२१ रविवार को शहर के ए टी रोड स्थित लायन के के सहरिया आई होस्पिटल के दूसरे तल्ले पर स्थित लायन राधेश्याम अग्रवाल पेक्षागृह में किया गया !*
 
*कार्यक्रम की शुरुआत लुइतपोरिया स्वर्ण शाखा साहित्य सभा के संस्थापक अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल , शाखा के वरिष्ठ सदस्य एवं डिब्रुगढ़ के समाजसेवी आत्माराम बिरमीवाल ( अग्रवाल ) , शाखाध्यक्षा पुष्पा बुकलसरिया एवं शाखासचिव सुरेश अग्रवाल को मंचासीन करवाकर हुआ , तत्पश्चात मंचासीन अतिथियों द्वारा मां शारदे की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वल्लन किया गया !* 
*मंचासीन अतिथियों का फुलाम गमछे से स्वागत किया गया ! शाखा के उपाध्यक्ष श्री राधेश्याम ढढं द्वारा गणेश वंदना के साथ ही सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने खड़े होकर साहित्य सभा के प्रारम्भिक गीत "सिरो सेनेही मुर भाषा जननी ------------" गाकर सभा के कार्य का शुभारंभ किया गया !*
*सचिव सुरेश अग्रवाल द्वारा  स्वागत भाषण एवं सभा की उद्देश्य व्याख्या करने के बाद उक्त कार्यकारिणी समिति के कार्यकाल में सम्पादित मुख्य कार्यों का संक्षिप्त विवरण, "सचिव का प्रतिवेदन" के रूप में सभा के सामने पाठ करके सभा के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया सभा में उपस्थित लुइतपोरीया शाखा साहित्य सभा के प्रतिष्टापक सभापति श्री राजकुमार अगरवाल ने अपने संक्षिप्त भाषण में उक्त शाखा सभा की स्थापना करने का उद्देश्य के बारे में बताया और उक्त उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए शाखा सभा के कार्य को गति देने पर जोर दिया ।*

*विशिष्ट समाज सेवी आत्माराम बिरमीवाल ( अग्रवाल ) ने अपने वक्तव्य में रुप कुंवर ज्योति प्रसाद अगरवाला की बहुमुखी प्रतिभा को जन जन तक पहुंचाने तथा विद्यार्थियों को भी ज्योति प्रसाद जी के कृतित्व को हृदयंगम करने के लिए अपना विचार रखा ।*

*सभा में उपस्थित श्री प्रदीप मारोदिया, श्रीमती अर्चना पाण्डेय, श्री पवन गाड़ोदिया , सुमन शर्मा ( पत्रकार ) ,  वर्षा अग्रवाल आदि कई सदस्यों ने अपना-अपना विचार रखा ।*

*शाखा सभा द्वारा आयोजित उक्त सभा का मुख्य उद्देश्य पूरानी कार्यकारिणी समिति का पदत्याग और नयी कार्यकारिणी समिति का गठन था ! नई कार्यकारिणी में सभापति और सचिव का कार्यभार पुर्व सभापति श्रीमती पुष्पा बुकलसरिया को और पुर्व सचिव श्री सुरेश अग्रवाल को ही दिया गया, साथ ही कार्यकारिणी समिति के अन्य सदस्यों का भी चयन करके नयी कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया और उन्हें कार्यभार सोपा गया ।*

*नई कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष के लिये प्रदीप मारोदिया ( ज्योतिनगर ) एवं अर्चना पांडेय ( उदालगुड़ी , दिनजान ( तिनसुकिया ) को , सहसचिव के लिये सन्दीप अग्रवाल एवं श्रीमति वर्षा अग्रवाल (  जालान ) , कोषाध्यक्ष के लिये पवन गाड़ोदिया एवं प्रचार प्रसार विभाग के लिये डॉ महेश जैन को शामिल किया गया है ! बाकी की कार्यकारिणी का विस्तार लुइतपोरिया की अगली कार्यकारिणी सभा में किया जाएगा !*

*नव निर्वाचित सभापति और नव निर्वाचित सचिव ने  में सभा में उपस्थित सभी सदस्य एवं गणमान्य व्यक्तियों को धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी का पूर्ण सहयोग की आशा करते हुए अपना अपना संक्षिप्त भाषण रखा ।*
*सभा के अन्त में सचिव सुरेश अग्रवाल  ने सभा में उपस्थित सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया और जातिय संगीत "ओ मुर आपुनार देश -------- " गाकर सभा समाप्ति की घोषणा की गई । यह जानकारी सचिव सुरेश अग्रवाल ने दी है !*

Sunday, January 24, 2021

सोचे विश्वास करें और बनें

*सोचें, विश्वास करें और बनें*

शब्द और सोच बहुत शक्तिशाली होते हैं। इसलिए शब्द को ब्रह्म कहा जाता है। कोई भी मनुष्य वही होता है जो वह सोचता है। एक मनुष्य वह नहीं होता हो लोग उसके बारे में सोचते हैं बल्कि वह वही होता है जो वह स्वयं के बारे में सोचता है। अगर आप सोचते हैं कि कामयाब है तो आप बिल्कुल कामयाब है, अगर आप सोचते हैं कि आप जीत जायेंगे तो निश्चित ही आप जीतेंगे। इसमें कोई शंका नहीं हैं। प्रत्येक शब्द में एक शक्ति होती है। ठीक उसी प्रकार सोच में भी। अच्छे शब्द और अच्छी सोच हमारे दिमाग को शक्ति प्रदान करते हैं, हमें स्वस्थ्य रखते हैं, हमें अपने जीवन में ऊचाँइयों पर पहुँचाते हैं। इसलिए हमें हमेशा अच्छी चीजों पर ध्यान केंद्रित करना है और अच्छा ही सोचना है। हमें दूसरों के लिए तो अच्छा सोचना है साथ में अपने लिए भी बेहतरीन सोचना है क्योंकि आज हम जो कुछ भी हैं वह अतीत में सोचें हुए सोच का परिणाम हैं। आने वाले दिनों में बेहतरीन प्रदर्शन और परिणाम के लिए हमें अपने दिमाग में बेहतरीन योजनाएं बनानी होगी उसको सोचना होगा। सफलता किसी के  दिमाग के आकार पर निर्भर नहीं करती, वह तो सोच के आकार पर निर्भर करती है। ध्यान रहे आप जो सोचेंगे वही बनेंगे तो ध्यान से सोचिए आखिर आप बनना क्या चाहते है? जो आप रोज-रोज सोचेंगे वही आप धीरे-धीरे बनेंगे। 

आज निर्णय कीजिये कि सिर्फ बेहतरीन शब्दों को बोलेंगे, बेहतरीन सोच ही अपने दिमाग में रखेंगे। किसी और के कर्मों का हिसाब किताब ऊपर वाले के हवाले कर दे। अपने पवित्र मस्तिष्क में कोई भी बुरी बात प्रवेश न करने दें। निश्चित रूप से आप इस पृथ्वी पर महान कार्य कर जाएंगे। आपकी गणना महानतम व्यक्तियों में होगी। 

*अर्चना पांडेय अर्चि*
*अध्यक्ष, हिंददेश परिवार*

108 घण्टे चली देवी की आराधना

*हिंद देश परिवार का 108 घंटे देवी दुर्गा को समर्पित वर्चुअल कार्यक्रम* *देश विदेश के रचनाकारों ने देवी मां के साथ घर की मां की पूजा का किया ...