Monday, June 21, 2021

बड़ाई करीं

नमन मंच
21-06-2021
विधा - पद्य ।


दूसरा के बड़ाई करीं,
हौसला अफ़जाई करीं।
आपस मे ना लड़ाई करीं,
कबो ना मन-मोटाई करीं।।

अपने मुंह मिया मिट्ठू,
ना बनीं केहू के पिट्ठू।
कबहु नत बौराई करीं,
दूसरा के बड़ाई करीं।।

बड़ाईं कइल खुदे फरी,
अउर जरे वाला मरी।
ओकर विचार करीहें हरि,
सुखल डाड़ में डंका धरी।।

बड़ाईं संस्कार लाई,
प्यार-सद्व्यवहार ह ई।
एक-दूजे में विश्वास जगाई,
इहे हमनीं के समाज बढ़ाईं।।

कवि संतोष कुमार, 
पश्चिमी चंपारण, बिहार।

चलालें भुवर गाँव के ओर

*********

गाड़ी धरे  गइलें भुअर  लोग के लउकल  मेला, 
काँपल करेज भीड़ देख   आ ओजवा के खेला। 
पनरे गो से बेसी मोटरी        रखले रहस मगरूँ, 
कूलर संगे तीन गो पंखा      टंगले रहस झगरू। 
गोलू भोलू पहिया वाला    रहस धउरावत  पेटी, 
डब्बा खोजे में शिवलोचन के  भूला गइली बेटी।
लोग रहे धउरत अइसे कि     आइल होखे लहर, 
आत्रा मात्रा सब भूलइलें     संगे भूलाइल बहर। 

रहे आरक्षित अनारक्षित के   एके जइसन हाल, 
बाल्टी का पेनी से  छिलाइल  गणपति के गाल। 
कुकर के झोरा गोली बिगली, जान के सीट पर, 
बाप बाप चिल्लइलें दीना चोट लागल पीठ पर।
चढ़े में लागल रहस सोनू चोर ले गइल मोबाइल, 
चेन खुल गइल चनेसर के साबुन सरफ छीटाइल। 
सोंचले भुअर एह दशा में    कइसे करब  जतरा, 
जेने देखीं ओनहीं एजा त   लउकत बाटे खतरा। 
दृश्य देख लागल कि बरपी जतरा में बहुते कहर, 
आत्रा मात्रा सब भूलइलें     संगे भूलाइल बहर।

शीत ताप नियंत्रित डिब्बा के रहे टिकस कटाइल, 
भीड़ भाड़  रहे ना बेसी  आराम से सीट भेंटाइल। 
ट्रेन का खुलते पसरे लगलें     यात्री ओढ़ के चदर, 
आ कुछे देर में मच्छरन के दल करे  लागल उपदर। 
हाँकत बेलावत थपरी बजावत   बीतल आधा रात, 
ले गइल ले गइल बाकस ले गइल रहे केहू चिल्लात। 
भोरे उठ जब नीचा देखलें     पीटलें बेचारू छाती, 
जूता बैग कुछहु ना रहे उड़इलस चोर सब थाती। 
चल दिहले हाथ दुमावत      धइले गाँव के डहर, 
कान ध के किरिया खइलें  फेरू ना जाइब शहर। 

 दिलीप पैनाली


मिसरी जइसन भोजपुरी

नमन मंच हिन्ददेश परिवार🙏🙏🙏

विधा - कविता
दिनांक - 19-06-2021

शीर्षक : मिसरी जइसन भोजपुरी बोली
–----------------

मिसरी जइसन भोजपुरी बोली।
मुखाग्र  से निकले जैसे डोली।
मीठा, लरम, कोमल सुभाव एकर,
तबे ई रंग-बिरंग के लागे रंगोली।

मन हरे, सोहाए हवे ना कुबोली। 
मिसरी जइसन भोजपुरी बोली।
अब त कै गो देशवनों में बा पसर,
गईल भोजपुरिया माटी के होली।

जे बोले से ही एके भाव मोली।
मिसरी जइसन भोजपुरी बोली।
त काहे ना उठी मनवा में लहर,
एकरो विकास ला बनाईंजा टोली।

स्वरचित एवं मौलिक कृति द्वारा :-

संतोष कुमार,
कवि, 
पश्चिमी चंपारण, बिहार।

योग दिवस

     🌷योग दिवस🌷
🧘🧎🧍🚶🏃🏋️⛹️🤾
कुमार अजय सिंह 9934483155
🙏🙏🙏🙏🙏🙏
समय निकाल के योग दिवस पर चली चलके कुछ योग करी
सुखमय जिन्दगी जीए खातिर आईल समय के उपयोग करी
01.होत सबेरे घूमी फिरी पीही सुसुम पानी
ऐह जीवन के लक्ष्य बड़हन बा समय के पहचानी
अपना खातिर अपने हाथे तन मन से उतयोग करी
समय निकाल के योग दिवस पर चली चलके कुछ योग करी
02.अनुलोम-विलोम कपाल भारती अवरु करि दू चार गो आसन
ऐह शरीर के स्वस्थ राखी ना त रोगवे बनी दुस्सासन
ई दुनिया ह माया के नगरी चिन्ता छोड़ी मत कवनो सोग करी
समय निकाल के योग दिवस पर चली चलके कुछ योग करी
03.बाबा आजी चाचा चाची हित
मित्र सुनी भईया
हंस खेल के समय बिताई ऐही में बा भलईया 
राम रहीम अल्लाह गुरु के कृपा जान के जवन मिले ऊ उपभोग करी
समय निकाल के योग दिवस पर चली चलके कुछ योग करी 

04.व्याम करि खूब काम करि समय पर खान पान स्नान करि
कहस " अजय " निहोरा कके सपरे त पूजा पाठ आऽ कुछ दान करि
भाव भगवान के भोग ह मिली शान्ति
देहिया के निरोग करी
समय निकाल के योग दिवस पर चली चलके कुछ योग करी
          🙏🙏🙏🙏🙏

Saturday, June 19, 2021

बरसा परत रहे

🌹वर्षा परत रहे भारी🌹
🏖️🏖️🏖️🏖️🏖️🏖️🏖️🏖️
  गीत:-कुमार अजय सिंह
      9934483155
आज त दिन भर सबेरहीं से बरखा परत रह गईल भारी
जाऐ के रहे गांव पर ना जा पवनी बईठल रह गईनी होके तईयारी
01.ताकत ताकत कि अब छुटी वर्षा अतने में हो गईल दुपहरिया 

केवाड़ी खोल के झकनी त घाटा घेरले बड़ुऐ अबही तकले करीया 

अब का करिं कईसे जाई मनवा के कसहूं मनवनी बरियारी
जाऐ के रहे गांव पर बईठल रह गईनी होके तईयारी
02.ऐही बीचे लाखन सिंह के झारखंड से फोन आ गईल झटके 

कहलन कि विधायक जय मंगल सिंह के शादी साल गिरह पर आजे मिटींग कराद टटके 

हमहू सोचनी चल आज के रोजगार मिलीऐ गईल बईठला से निमन बेगारी
जाऐ के रहे गांव पर ना जा पवनी बईठल रह गईनी होके तईयारी 

03.का करब ऐह जीवन से अब गीत कविता समाज सेवा मीटिंग सिटिंग ना छुटी 
चाहे दुनिया भाड़ में जाए ईहे हो गईल बा अब जीऐ खातिर संजीवन बुटी
"अजय"आरा शहर में घेराईल रहले जहवा एगो पशु आहार बिजनेस के हवे छोट व्यापारी 

जाऐ के रहे गांव पर ना जा पवनी बईठल रह गईनी होके तईयारी

108 घण्टे चली देवी की आराधना

*हिंद देश परिवार का 108 घंटे देवी दुर्गा को समर्पित वर्चुअल कार्यक्रम* *देश विदेश के रचनाकारों ने देवी मां के साथ घर की मां की पूजा का किया ...