Monday, June 21, 2021

बड़ाई करीं

नमन मंच
21-06-2021
विधा - पद्य ।


दूसरा के बड़ाई करीं,
हौसला अफ़जाई करीं।
आपस मे ना लड़ाई करीं,
कबो ना मन-मोटाई करीं।।

अपने मुंह मिया मिट्ठू,
ना बनीं केहू के पिट्ठू।
कबहु नत बौराई करीं,
दूसरा के बड़ाई करीं।।

बड़ाईं कइल खुदे फरी,
अउर जरे वाला मरी।
ओकर विचार करीहें हरि,
सुखल डाड़ में डंका धरी।।

बड़ाईं संस्कार लाई,
प्यार-सद्व्यवहार ह ई।
एक-दूजे में विश्वास जगाई,
इहे हमनीं के समाज बढ़ाईं।।

कवि संतोष कुमार, 
पश्चिमी चंपारण, बिहार।

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