Tuesday, February 23, 2021

आदरणीय बजरंग तोदी स्वर्ण जी हिंददेश डिब्रुगढ़ के जिला अध्यक्ष बने।

डिब्रूगढ़ (असम): इस्माइल एन जी ओ के संस्थापक, प्रतिष्ठित व्यवसायी आदरणीय बजरंग तोदी स्वर्ण जी को हिंददेश परिवार डिब्रूगढ़ इकाई का जिला अध्यक्ष मनोनीत किया गया ।
      हिंददेश परिवार की संस्थापिका /अध्यक्षा आदरणीया अर्चना पाण्डेय अर्चि जी के निर्देश पर संयोजक आदरणीय सुधीर   श्रीवास्तव ने उनके मनोनयन की घोषणा की और 
     अपने मनोनयन से उत्साहित आदरणीय तोदी  ने हिंददेश परिवार का आभार व्यक्त किया और विश्वास दिलाया कि परिवार के उद्देश्यों, संकल्पों को पूरा करने,कराने लिए वे हर संभव योगदान देते रहेंगे और संसार भर में सकारात्मक भाव, खुशहाली, प्रेम,भाई चारा बनाने की दिशा में तन,मन,धन से समर्पित रहेंगे।
 उनके मनोनयन पर परिवार की अध्यक्षा सहित अनेक परिवार के पदाधिकारियों महाप्रभारी आ.संतोष अडपावार, महासचिव आ.बजरंग लाल केजड़ीवाल, अनुशासन   प्रमुख आ.पुष्पा बुकलसरिया,  उपाध्यक्ष डा.महेश जैन अमृत, सुरेश आग्रवालआयुष, हिंददेश विश्वबंधुत्व के  प्रभारी आ.अमित बिजनौरी तथा सचिव आदरणीया सुजात खेतान ने उनको बधाई दी।  आ.अभिषेक मिश्रा, आ.कवि विकास द्द्विवेदी,आ.कविता पाल बबली, आ.पल्लवी भूंइया, आ.मंजूरी डेका, आ.वंदना चौबे, आ.आशापूर्णा डेका, आ.नीलू सक्सेना, आ.मधुमिता ,आ.इंदू उपाध्याय इंदू, आ.माधुरी भट्ट मधु,आ.  प्रियंका प्रियदर्शिनी सहित अनेक , राष्ट्रीय, इकाई,हिंददेश पत्रिका पदाधिकारियों, जिला प्रभारी आ. मुस्कान वर्मा ,रक्तमंडली संयोजक सुधीर श्रीवास्तव सहित अनेक संगठनों के पदाधिकारियों, साहित्यकारों, व्यापारियों ने आ.तोदी को बधाइयाँ और शुभकामनाएं दी हैं।
      अपने मनोनयन से प्रफुल्लित आ.तोदी ने डिबूरगढ़ में 28 फरवरी को कवि सम्मेलन आयोजित कराने की जानकारी से अवगत कराते हुए कहा कि उक्त आयोजन में भाग लेने के इच्छुक रचनाकार/कवि उनसे सीधे संपर्क कर  सम्मिलित हो सकते हैं।

Monday, February 22, 2021

सत्य का ज्ञान

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अनुशासन मन में रमे, 
रहे सत्य का ज्ञान ।
राग कलुषता छोड़ दें,
करें नहीँ अभिमान ।।
सत्य सहारा ही बने,
रखें ईश का ध्यान ।
व्यर्थ विमर्षक हों नहीं,
देश -प्रेम संज्ञान ।।
विनय शील गुण धर्म हो,
हो सबका सम मान ।
अनुशासन मन में रमे,
रहे सत्य का ज्ञान ।।
सत्याग्रह की आड़ में,
हो न कभी नुकसान ।
गरिमा धूमिल हो नहीं,
लोकतंत्र की शान ।।
हट रट से हल हो नहीं,
कहते सन्त सुजान ।
अनुशासन मन में रमे ,
रहे सत्य का ज्ञान ।।
जन-जीवन खुशियाँ वहैं,
विकसित हो विज्ञान ।
प्रगति किसी की ना रुके,
टूटे नहीं विधान ।।
भाव अनुज मन प्रेम का,
करो सदा गुणगान ।
अनुशासन मन में रमे,
रहे सत्य का ज्ञान ।।
डॉ अनुज कुमार चौहान "अनुज"
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश ।

दैनिक यात्रा

मातृ भाषा



कल्याणी राष्ट्रभाषा हमारी सँस्कृत है जन्मदायिनी।
ओत प्रोत है समरस से प्यारी अपनी मातृ वाणी।

उद्घोषक स्वतंत्रता की, जन जन में उल्लास भरे।
बनी एकता की संवाहक, प्रसार मानवता की करे।

भाव इसके जन-गण-मन सबका जीवन उजियार करे।।
दूर रहे सब वैर -भाव से   एकजुटता का आह्वान करें।

उच्चरित होती हिंदी की विमल-वाणी जिस, मुख से 
अर्थ हो जाते स्वयं मुखरित ,सप्त-स्वर में वेद-ऋचाओं के। 

क्षमता आत्मसात् करने की  ,अपनी हिंदी अति विलक्षण ।
यह भाषा है अति  प्रियकर,   आकर्षित करती तत्क्षण।।

हम हिंदी का तेज़ बढ़ाएं,ऐसी प्रतिज्ञा हम  सभी  करें  ।
किसी भी भाषा का कोई  हो, मित्रता  को  नहीं लजाएं।।

हिंदी  में  हम सब बोलें हरसू ,विपन्नता का भाव न आए ।
पालक पोषक विश्व-शांति के, हिंदी से सबका मन हर्षाये।।
 
इन्दु उपाध्याय

हिंददेश परिवार की एक नई इकाई बनी, हिंददेश परिवार दिल्ली

हिंददेश परिवार दिल्ली इकाई का भव्य उद्घाटन, काव्यमेघ सम्पन्न,विदेशी कलमकार भी हुए शामिल
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दिल्ली:हिंददेश परिवार के दिल्ली इकाई के फेसबुक पटल का भव्य उद्घाटन एवं बसन्तोत्सव के अवसर पर अ.भा.कवि सम्मेलन काव्यमेघ शानदार और उल्लास भरे माहौल में 21.02.2021  को संपन्न हुआ।
    हिंददेश परिवार के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी श्री सुधीर श्रीवास्तव के संयोजकत्व में इस कार्यक्रम की शुरूआत हिंददेश पत्रिका की सह सम्पादक और हिंददेश परिवार के         प्रमाणन अधिकारी/आयोजन प्रभारी द्वारा संयुक्त रूप से माँ सरस्वती के पूजन अर्चन से हुई।
वरिष्ठ साहित्यकार आ.रतन कुमार शर्मा, अंकुर सिंह,आ.अंशी कमल,आ.वंदना चौबे की सरस्वती वंदना ने मन मोह लिया।
 दिल्ली इकाई प्रभारी आ.युवा कवि विकास द्विवेदी जी ने सभी अतिथियों /कवियों का स्वागत किया।अपने अभिव्यक्ति मे हिन्ददेश परिवार के उद्देश्य को उजागर किया  कि सम्पूर्ण विश्व में सद्भावना का  संचार करना और जगत के  कल्याण के लिए अपने सद्कर्मो और सद्विचारों को  अपनाने ,जन जन तक पहुँचाने के लिए आमंत्रित हैं।  साथ ही यह भी संदेश दिया कि हम सभी मिलकर सुन्दर  संसार का  निर्माण करने के लिए  दृढ़ संकल्पित है। 
      उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ चित्रकार आ.शिव शंकर लोध राजपूत जी(दिल्ली) रहे।
       अपने संक्षिप्त किन्तु सारगर्भित संदेश में मुख्य अतिथि आ.राजपूत जुने हिंंददेश परिवार के उद्देश्यों की भूरि भूरि प्रशंसा की और परिवार की अध्यक्षा अर्चना पाण्डेय अर्चि जी के व्यक्तित्व, चिंतन और हौसले की सराहना करते हुए उन्हें, और हिंददेश परिवार को बधाइयाँ ,शुभकामनाएं दी।
         कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंददेश परिवार की संस्थापिका/अध्यक्षा आ.अर्चना पाण्डेय 'अर्चि' ने किया। 
      कार्यक्रम में देश भर के लगभग सत्तर से अधिक कवियों/कवित्रियों ने की शुभकामना संदेशों और खूबसूरत रचनाओं से पूरे आयोजन को उल्लासमय बना दिया।कार्यक्रम में हिंददेश परिवार/पत्रिका और इकाई पदाधिकारियों की गरिमामय उपस्थिति रही।
    महासचिव आ.बजरंग लाल केजड़ीवाल जी ने सरस्वती वंदना के साथ हिंददेश परिवार, हिंददेश रक्तमंडली, हिंददेश पत्रिका और प्रस्तावित विद्यालय पर विस्तार से प्रकाश डाला।उपाध्यक्ष डा.महेश जैन अमृत ,महाप्रभारी संतोष आडपावार जी,बिहार इकाई अध्यक्ष आ.मधुमिता, उ.प्र. अध्यक्ष आ.रुबी गुप्ता,आसम अध्यक्ष आ.पल्लवी भूंइया के अलावा आ.ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम , आ.माधुरी भट्ट मधु,आ.इंदू उपाध्याय इंदू ने हिंददेश परिवार के उद्देश्यों को रेखांकित खरते हुए परिवार की मजबूती पर बल दिया।
अनुशासन प्रमुख आ.पुष्पा बुकलसरिया ने रक्तमंडली के लिए संयोजक आ.सुधीर श्रीवास्तव की विशेष प्रशंसा की और सभी को आशीर्वाद देते हुए हिंददेश परिवार के संकल्प को दोहराया, साथ ही सफलता का भरोसा दिलाया।
    अंतरराष्ट्रीय कवयित्री आ.स्मृति त्रिवेदी(दोहा,कतर)और आ.कल्पना पारीक(नैरोबी, केनिया)ने भी हिंंददेश परिवार ,इकाई उद्घाटन और परिवार से जुड़ने पर प्रसन्नता व्यक्त की और हर संभव सहयोग के अलावा हिंददेश परिवार को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का भरोसा भी दिलाया ।
    अपने अध्यक्षीय भाषण में अध्यक्षा आ.अर्चना पाण्डेय 'अर्चि' जी ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी सदस्यों एवं पदाधिकारियों को बधाइयाँ और शुभकामनाएं दी।अपने सारगर्भित संबोधन में उन्होंने हिंददेश परिवार के बुनियादी उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंददेश परिवार साहित्य के माध्यम से संसार को सुंदर और खुशहाल बनाने को दृढ़ संकल्पित है।इस संसार में जितनी भी प्राकृतिक संपदाएं है,पशु पक्षी, जीव जन्तु, पेड़ पौधे हैं,सभी का उचित प्रयोग हो,मान सम्मान मिले और प्रत्येक मानव एक दूसरे से सहयोग की भावना से मिले और एक दूसरे का मान सम्मान करे।यही हमारे हिंददेश परिवार का मुख्य उद्देश्य है।हम ऐसे समाज का निर्माण करें जहां सबमें एक दूसरे के लिये प्रेम ही प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब हम कोई भी अच्छा काम करते हैं,तब सारी सृष्टि हमारे साथ होती है और हमारी सफलता के लिए किसी न किसी रुप में हमारी सहायता करती है।
    उन्होंने उम्मीद जताई कि हम निश्चित ही संसार को सुंदर बनाने में जरूर सफल होंगे, क्योंकि आप सभी हमारे और हिंददेश परिवार के साथ हैं।
    आ.अमित कुमार बिजनौरी ने सभी अतिथियों/कवियों का धन्यवाद प्रकट करते हुए उम्मीद जताई कि जिस उत्साह के साथ उद्घाटन कार्यक्रम में सभी की भागीदारी रही, उसी तरह आगे भी सभी का  स्नेह/सहयोग हिंददेश परिवार और इकाई के सतत विकास में सभी का सार्थक सहयोग मिलता रहेगा।
    आज के आयोजन प्रभारी आ.अमित बिजनौरी ने सभी पदाधिकारियों/कवियों को रा.नेतृत्व की सहमति से सम्मानित करने की घोषणा करते हुए राष्ट्रीय, प्रांतीय पदाधिकारियों के प्रति उचित मार्गदर्शन/विश्वास के लिए और सभी कवियों के सहयोग/उपस्थिति के लिए धन्यवाद /आभार प्रकट किया।
संयोजक आ.सुधीर श्रीवास्तव ने रक्तमंडली से अधिक से अधिक लोगों सेजुड़ने/जोड़ने की भावुक अपील करते हुए रक्त संबंधी जरुरतों की दिशा में अधिकतम सूचना आगे बढ़ाने फर जोर दिया और कहा कि हिंददेश परिवार मात्र संगठन नहीं बल्कि रिश्तों की महत्ता भी प्रदान करता हैं खून के रिश्तों के अलावा भी पारिवारिक रिश्तों का बड़ा परिवार भी समय के साथ और बड़ा होता जा रहा।जहां एक बार शामिल होने के बाद अलग होना लगभग असंभव है।इसके लिए उन्होंने खुद का उदाहरण भी दिया ।
अंत में रा.मीडिया प्रभारी/कवि/पत्रकार आ.बिक्रांत ठाकुर और दिल्ली के नव नियुक्त प्रभारी युवा कवि विकास द्विवेदी  ने संयुक्त रूप से सभी अतिथियों, पदाधिकारियों,कलमकारों से हिंददेश परिवार को सहयोग, समर्थन और सुझावों की अपील के साथ आभार धन्यवाद ज्ञापित  किया।

Thursday, February 11, 2021

पुस्तक विमोचन संपन्न

डिब्रूगढ़ में पुस्तक विमोचन समारोह सम्पन्न 

डिब्रूगढ़ के जाने माने साहित्यकारों डॉ महेश कुमार जैन ' अमृत ' एवं बजरंग तोदी ' स्वर्ण ' की पहली पुस्तकों क्रमशः " कविता की मुस्कान " एवं  " तिनका तिनका " के विमोचन समारोह का आयोजन हॉल ही में शहर के मारवाड़ी पट्टी चाराली स्थित होटल राजवास के सभागार में किया गया ! कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों क्रमशः डिब्रूगढ़ के जाने माने चाय उधोगपति एवं साहित्यकार देवी प्रसाद बागडोदिया , शहर के जाने माने चिकित्सक एवं साहित्यकार डॉ नारायण उपाध्याय एवं अर्चना पांडेय ( हिंददेश की संस्थापक ) सहित डॉ महेश कुमार जैन एवं बजरंग तोदी को मंचासीन करवाकर हुई ! मंचासीन सभी मुख्य अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया , कार्यक्रम की शुरुआत में तिनसुकिया से पधारी कवियत्री रितु गोयल ' सरगम ' द्वारा गणेश एवं सरस्वती वंदना एवं राधेश्याम ढंढ द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया ! 
ऊपरी असम की चाय नगरी डिब्रूगढ़ में जाने-माने साहित्यकारों, लेखकों, कवियों, शिक्षाविदों, और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में दो अलग-अलग स्वरचित कविता पुस्तक का विमोचन समारोह भव्य रुप में आयोजित किया गया। मालूम हो कि मध्य वित्तीय परिवार के मेधावी तथा डिब्रू कॉलेज के प्राध्यापक तथा शिक्षाविद कवि डॉ महेश कुमार जैन ने शिक्षा जगत में अपना परचम लहरा कर कविता लेखन कार्य में भी परचम लहरा दिया है इस कड़ी में उनकी स्वरचित पुस्तक  "कविता की मुस्कान" का विमोचन जाने-माने साहित्यकार देवी प्रसाद बागडोदिया ने किया जबकि बजरंग तोदी की स्वरचित कविता पुस्तक "तिनका तिनका" का विमोचन जाने माने लेखक चिकित्सक डॉ नारायण उपाध्याय ने किया , इस मौके पर विमोचन कर्ताओं ने संबोधित करते हुए कवियों की हौसला अफजाई करते हुए उन्होंने कहा यह कविता पुस्तक पाठकों में अपनी जगह बना सकेगी तथा इनमें प्रकट किए गए भाव समाज में सभी को लाभान्वित करेंगे  उन्होंने मौके पर कवियों को प्रोत्साहित किया और आने वाली पीढ़ी को कविता पुस्तक में अधिक रुझान भरने की सलाह भी दी ! कार्यक्रम के दौरान डिब्रू महाविधालय के डॉ महेश जैन के सह शिक्षकों द्वारा उनका सम्मान किया गया , वंही मारवाड़ी सम्मेलन , डिब्रूगढ़ एवं लुइतपोरिया स्वर्ण शाखा साहित्य सभा , स्माइल एनजीओ , सिल्का लय परिवार द्वारा भी डॉ महेश जैन एवं बजरंग तोदी को सम्मानित किया गया ! कार्यक्रम के दौरान डिब्रूगढ़ के कवि प्रदीप मारोदिया द्वारा उनकी स्वरचित कविता " असत्य की नाव पर सच खोजने मैं चला " , युवा कवयित्री मुस्कान वर्मा द्वारा " स्वाभिमान ही मेरा गहना " , अर्चना पांडेय द्वारा देश प्रेम , देश भक्ति से ओत प्रोत कविता एवं पुष्पा बुकलसरिया द्वारा भी काव्य पाठ किया गया , इन सभी कवि कवयित्रियों ने अपनी कविताओं के जरिये उपस्थित सभी की वाह वाही भी बटोरी ! 
कार्यक्रम में तिनसुकिया से पधारी सुजाता खेतान अग्रवाल , डिब्रु महाविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यापक समीर झा एवं सुरेश अग्रवाल ( शांतिपाड़ा ) ने भी अपना सम्बोधन रखा ! 
डॉ महेश जैन एवं बजरंग तोदी ने भी अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ किया !
अपने सम्बोधन में डॉ महेश जैन ने कहा कि 
एक फलदार वृक्ष , हमेशा फलों से लदा रहता है , एवं झुका रहता है , पर एक बांस का पेड़ लम्बा चौड़ा होकर भी सीधा तन कर खड़ा रहता है , कोई फल भी नही देता , इसलिये हमें उस फलदार वृक्ष की तरह बनना चाहिये !
एक पतंग चाहे कितनी ही देर हवा में उड़े  पर उसे निचे जमीन पर उतरना ही पड़ता है ! इसलिये इंसान को कभी अहम नही करना चाहिये ! उन्होंने बताया कि मैंने और बजरंग तोदी ने लॉक डाउन का सदुपयोग किया , जिसका नतीजा आज हमारी स्वरचित पुस्तकें आपके सामने विमोचन के लिये तैयार है ! अपने सम्बोधन में बजरंग तोदी ने कविता लेखन में उनको प्रोत्साहित करने के लिये युवा पत्रकार सन्दीप अग्रवाल का भी आभार व्यक्त किया !
ज्ञात हो कि इन दोनों पुस्तकों " कविता की मुस्कान " एवं " तिनका तिनका " का सम्पादन तिनसुकिया की कवयित्री अर्चना पांडेय ' अर्चि ' ने किया है ! 
कार्यक्रम का सफल संचालन लुइतपोरिया स्वर्ण शाखा साहित्य सभा की सह सचिव एवं डिब्रु महाविद्यालय की शिक्षिका श्रीमती वर्षा अग्रवाल ( जालान ) ने किया एवं धन्यवाद यापन बहुत ही खूबसूरत अंदाज़ में राजकुमार अग्रवाल ने किया ! कार्यक्रम में डॉ महेश जैन एवं बजरंग तोदी के चिर परिचित , परिवारजन सहित साहित्यिक ग्रुप " काव्य सुधा मंच " के सदस्य भी उपस्थित थे !

Saturday, February 6, 2021

सरस्वती वंदना

*सरस्वती वंदना*


हे विद्यादायिनी ! हे हंसवाहिनी !
करो अपनी कृपा अपरम्पार।
हे ज्ञानदायिनी ! हे वीणावादिनी !
बुद्धि दे !, करो भवसागर से पार।।

हे कमलवसिनी !, हे ब्रह्मापुत्री !
तम हर, ज्योति भर दे।
हे वसुधा !, हे विद्यारूपा !
वीणा बजा, ज्ञान प्रबल कर दे।।

हे वाग्देवी !, हे शारदे !
हम सब है, तेरे साधक।
हे भारती !, हे भुवनेश्वरी !
दूर करो हमारे सब बाधक।।

हे कुमुदी !, हे चंद्रकाति !
हम बुध्दि ज्ञान तुझसे पाए।
हे जगती !, हे बुद्धिदात्री !
हमारा जीवन तुझमें रम जाए।।

हे सरस्वती !, हे वरदायिनी !,
तेरे हाथों में वीणा खूब बाजे।
हे श्वेतानन !, हे पद्यलोचना !
तेरी भक्ति से मेरा जीवन साजे।।

हे ब्रह्म जाया !, हे सुवासिनी !
कर में तेरे ग्रंथ विराजत।
हे विद्या देवी !, हे ज्ञान रूपी !
ज्ञान दे करो हमारी हिफाजत।।


*अंकुर सिंह* 
चंदवक, जौनपुर, 
उत्तर प्रदेश -222129
मोबाइल नंबर - 8367782654.
व्हाट्सअप - 8792257267.

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तान हमारा

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां  हमारा 
हम बुलबुलों से चह्के महके वतन हमारा  ॥ 

बचपन गया जवानी, अब आ रहा बुढ़ापा 
चढ़ा रहे वतन पर भक्ति का हम  पुजापा॥ 

महफिल सजी सदा ही गाते रहे तराना 
यादे रही वतन क़ो ख़ू से पड़ा था पाना ॥ 

वो वीर  लड़ रहे है प्यारे वतन के खातिर 
बस्ती जला रहे सब हुक्मरान  काफिर ॥ 

अपना लहु बहाये हरदम  वतन तराना 
तूफ़ान बन के छाये वीरों का है फ़साना ॥ 

बेबाक इस शहर मेंं लो लुट रहा खजाना 
प्राचीर ढह रही है इसको है अब बचाना ॥ 

आओ अहद उठाये  ठोकर मेंं हो जमाना 
सोने की चिड़िया फ़िर से है देश क़ो बनाना ॥ 

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां  हमारा 
हम बुलबुलों से चह्के महके वतन हमारा ॥ 

डॉ़ इन्दिरा  गुप्ता  "यथार्थ "

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा

Friday, February 5, 2021

सड़क पुकारी


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नहीं निकासी जल की होती,
दिक्कत होती भारी ।
कदम - कदम ,उबड़-खाबड़ हूँ,
घायल सड़क पुकारी ।।
कहीं दिखूँ तालाब सरीखी,
नजर कहीँ ना आऊँ ।
चलते राहों में बच्चों को,
लाचार बहुत घवराऊँ ।।
नाला जैसा बना ह्रदय,
तन चोट सहूं मन भारी ।
कदम-कदम ,ऊबड़-खाबड़ हूँ,
घायल सड़क पुकारी ।।
गन्दा पानी लेत हिलोरे ,
मुझको आँख दिखाये ।
राहगीर क्या ?नजर करे ,
हर पल धरती शरमाये ।।
मेरे कारण हो दुर्घटना,
सह्ती कोप बेचारी ।
कदम -कदम ,ऊबड़ -खाबड़ हूँ,
घायल सड़क पुकारी ।।
लगूं कहीं अहसान किसी का,
मन भर खर्च उठाया ।
दिवा-रात्रि कुशल क्षेम भव,
गर्वित दर्पण तुड़वाया ।।
आज प्रेम खुद से खोया ,
सब दिखते वित्त-पुजारी ।
कदम-कदम ,ऊबड़-खाबड़ हूँ,
घायल सड़क पुकारी ।।
तारकोल है कहीँ अधिक,
कहीं तारकोल का नाम नहीं ।
गड्ढे जैसी बीमारी से ,
त्रसित मौन आराम नहीं ।।
कहीँ कोई बेचारी लिखता,
कहीं लिखता 'अनुज'किनारी ।
कदम -कदम ,ऊबड़-खाबड़ हूँ,
घायल सड़क पुकारी ।।
डॉ अनुज प्रताप सिंह चौहान "अनुज" अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)

प्रार्थना में शक्ति है।

नमन मंच
#हिंददेश परिवार
05.02.2021
प्रार्थना में असीम शक्ति
लेख

प्रार्थना में शक्ति
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     हम सबको पता है कि पूजा, प्रार्थना में असीम शक्ति है।हममें से शायद ही ऐसा कोई हो जिसे कभी न कभी इसका प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष अनुभव न हुआ हो।परंतु यह विडंबना ही है कि सब कुछ जानते हुए भी हम अविश्वास के साये से निकल नहीं पा रहे हैं या यूं कहें कि हमने अपने चारों ओर अविश्वास की मजबूत चादर ओढ़ रखी है।कहने का आशय यह है कि हमें खुद पर भरोसा ही नहीं है।फिर भला हम भगवान पर भरोसा क्यों करने लगे?
   हमें तो बस आरोप लगाने और हाथ झाड़कर निकल जाने की साफ बचकर निकल जाने की बीमारी जो है।
   वैसे तो भगवान ने हमें धरती पर सबसे प्रबुद्ध प्राणी बनाकर भेजा है।पर हम अपनी ही कारगुजारियों से सबसे मूर्ख भी बन गये हैं।
     अफसोस है कि मानव को अपने ही निर्माता पर भरोसा नहीं रह गया,तभी तो हम प्रार्थना नहीं आडम्बर मात्र में उलझकर रह गये हैं।हम अपनी पीड़ा, बेबसी, अव्यवस्था का रोना रोकर भगवान को दोष देकर मुक्त हो जाना चाहते हैं।परंतु भगवान पर विश्वास कर अपना अहम नहीं छोड़ना चाहते।
     प्रार्थना में शक्ति अशक्ति की बात तो हम तब देखें,जब हम वास्तव में निश्छल और पवित्र भाव से भगवान पर भरोसा करें,उस पर विश्वास करें,सारे निर्णय भी उह अदृश्य सत्ता रुपी भगवान को ही करने दें।अपने आपको उसके हवाले कर दें।लेकिन ये सब तब ही संभव है जब हम उस भगवान पर भरोसा करेंगे।
       कहते भी हैं कि पूजा, पाठ, व्रत, कीर्तन, तब तक व्यर्थ है जब तक हमारा विश्वास मजबूत नहीं है।
  पूजा, प्रार्थना, आराधना, नमाज तभी सार्थक है जब हम अपने आपको उस अदृश्य सत्ता की शरण में खुद को समर्पित कर दें।उस पर तनिक भी संसय न करें और यह विश्वास रखें कि उसके द्वारा मेरी खातिर लिया जाने वाला हर निर्णय हमेशा मेरे ही हितार्थ है/होगा।
     तभी हमें प्रार्थनाओं की वास्तविक और असीम शक्ति का पता चल सकेगा।क्योंकि कोई भी सृजक कभी भी अपने सृजन को नुकसान नहीं पहुँचाता।उसे सर्वश्रेष्ट ही देखना चाहता है।परंतु ये तभी संभव है जब सृजन खुद को अपने सृजक के हवाले पूरी तरह छोड़कर अपने कर्तव्य करे,प्रार्थना करे और उसकी शक्ति को महसूस करे।
विश्वास कीजिए तब उस प्रार्थना की शक्ति का अहसास खुद बखुद आपको हर पल अपने साथ महसूस होता ही रहेगा।

©सुधीर श्रीवास्तव
   गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
#मौलिक, स्वरचित

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

कोशिश कीजिये, हारिए नहीं, जीतिए
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        कहावत भी है कि कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।बस,जीत का फासला बताता रहता है कि कोशिश सिर्फ़ कोशिश है या जीतने की जिद।यदि हम पूरी ईमानदारी से कोशिश करेंगे तो निश्चित ही हार नहीं जीत होगी।कोशिश के भी अपने अपने तरीक़े हैं।हर किसी के नजरिए का फ़र्क कोशिशों में भी दिख ही जाता है।
      यदि हम अपनी कोशिश ईष्या, द्वेष, घमंड से दूर कर्तव्य, ईमानदारी और निष्ठा से ईश्वर का काम समझ कर करते हैं और खुद को ईश्वर का प्रतिनिधि मानकर करते हैं तो हार का प्रश्न स्वतः ही गौड़ हो जाता है।
     डा.छुटकी के शब्दों में हमारा हर काम ईश्वर का काम है और हमारी हार ईश्वर की हार होगी।तब भला ये कैसे माना जा सकता है कि हमारी हार ईश्वरक्यों होने देगा?क्या ऐसे में ईश्वर हार नहीं जायेगा?
    यह अलग बात है कि असफल हो सकते हैं पर हार नहीं सकते, क्योंकि
असफलता से सीख लेकर हम फिर से कोशिश दर कोशिश करते रहेंगे जीतने तक।लेकिन असफलता को अपनी हार का आवरण चढ़ाकर निराश नहीं होंगे और लगातार अटूट विश्वास के साथ अपनी कोशिश जारी रखेंगे और तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक जीत की मंजिल नहीं मिल जाती।क्योंकि हमारी हार ईश्वर की हार है और अपने ईश्वर की हार हम होने नहीं देंगे।
  आइए !फिर से नयी कोशिश करते हैं हार को जीत में बदलते हैं,ईश्वर का मान रखते हैं,उस पर विश्वास करते हैं।
✍ सुधीर श्रीवास्तव
       गोण्डा, उ.प्र.
     8115285921
©मौलिक, स्वरचित

108 घण्टे चली देवी की आराधना

*हिंद देश परिवार का 108 घंटे देवी दुर्गा को समर्पित वर्चुअल कार्यक्रम* *देश विदेश के रचनाकारों ने देवी मां के साथ घर की मां की पूजा का किया ...