Friday, February 5, 2021

प्रार्थना में शक्ति है।

नमन मंच
#हिंददेश परिवार
05.02.2021
प्रार्थना में असीम शक्ति
लेख

प्रार्थना में शक्ति
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     हम सबको पता है कि पूजा, प्रार्थना में असीम शक्ति है।हममें से शायद ही ऐसा कोई हो जिसे कभी न कभी इसका प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष अनुभव न हुआ हो।परंतु यह विडंबना ही है कि सब कुछ जानते हुए भी हम अविश्वास के साये से निकल नहीं पा रहे हैं या यूं कहें कि हमने अपने चारों ओर अविश्वास की मजबूत चादर ओढ़ रखी है।कहने का आशय यह है कि हमें खुद पर भरोसा ही नहीं है।फिर भला हम भगवान पर भरोसा क्यों करने लगे?
   हमें तो बस आरोप लगाने और हाथ झाड़कर निकल जाने की साफ बचकर निकल जाने की बीमारी जो है।
   वैसे तो भगवान ने हमें धरती पर सबसे प्रबुद्ध प्राणी बनाकर भेजा है।पर हम अपनी ही कारगुजारियों से सबसे मूर्ख भी बन गये हैं।
     अफसोस है कि मानव को अपने ही निर्माता पर भरोसा नहीं रह गया,तभी तो हम प्रार्थना नहीं आडम्बर मात्र में उलझकर रह गये हैं।हम अपनी पीड़ा, बेबसी, अव्यवस्था का रोना रोकर भगवान को दोष देकर मुक्त हो जाना चाहते हैं।परंतु भगवान पर विश्वास कर अपना अहम नहीं छोड़ना चाहते।
     प्रार्थना में शक्ति अशक्ति की बात तो हम तब देखें,जब हम वास्तव में निश्छल और पवित्र भाव से भगवान पर भरोसा करें,उस पर विश्वास करें,सारे निर्णय भी उह अदृश्य सत्ता रुपी भगवान को ही करने दें।अपने आपको उसके हवाले कर दें।लेकिन ये सब तब ही संभव है जब हम उस भगवान पर भरोसा करेंगे।
       कहते भी हैं कि पूजा, पाठ, व्रत, कीर्तन, तब तक व्यर्थ है जब तक हमारा विश्वास मजबूत नहीं है।
  पूजा, प्रार्थना, आराधना, नमाज तभी सार्थक है जब हम अपने आपको उस अदृश्य सत्ता की शरण में खुद को समर्पित कर दें।उस पर तनिक भी संसय न करें और यह विश्वास रखें कि उसके द्वारा मेरी खातिर लिया जाने वाला हर निर्णय हमेशा मेरे ही हितार्थ है/होगा।
     तभी हमें प्रार्थनाओं की वास्तविक और असीम शक्ति का पता चल सकेगा।क्योंकि कोई भी सृजक कभी भी अपने सृजन को नुकसान नहीं पहुँचाता।उसे सर्वश्रेष्ट ही देखना चाहता है।परंतु ये तभी संभव है जब सृजन खुद को अपने सृजक के हवाले पूरी तरह छोड़कर अपने कर्तव्य करे,प्रार्थना करे और उसकी शक्ति को महसूस करे।
विश्वास कीजिए तब उस प्रार्थना की शक्ति का अहसास खुद बखुद आपको हर पल अपने साथ महसूस होता ही रहेगा।

©सुधीर श्रीवास्तव
   गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
#मौलिक, स्वरचित

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