Friday, February 5, 2021

सड़क पुकारी


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नहीं निकासी जल की होती,
दिक्कत होती भारी ।
कदम - कदम ,उबड़-खाबड़ हूँ,
घायल सड़क पुकारी ।।
कहीं दिखूँ तालाब सरीखी,
नजर कहीँ ना आऊँ ।
चलते राहों में बच्चों को,
लाचार बहुत घवराऊँ ।।
नाला जैसा बना ह्रदय,
तन चोट सहूं मन भारी ।
कदम-कदम ,ऊबड़-खाबड़ हूँ,
घायल सड़क पुकारी ।।
गन्दा पानी लेत हिलोरे ,
मुझको आँख दिखाये ।
राहगीर क्या ?नजर करे ,
हर पल धरती शरमाये ।।
मेरे कारण हो दुर्घटना,
सह्ती कोप बेचारी ।
कदम -कदम ,ऊबड़ -खाबड़ हूँ,
घायल सड़क पुकारी ।।
लगूं कहीं अहसान किसी का,
मन भर खर्च उठाया ।
दिवा-रात्रि कुशल क्षेम भव,
गर्वित दर्पण तुड़वाया ।।
आज प्रेम खुद से खोया ,
सब दिखते वित्त-पुजारी ।
कदम-कदम ,ऊबड़-खाबड़ हूँ,
घायल सड़क पुकारी ।।
तारकोल है कहीँ अधिक,
कहीं तारकोल का नाम नहीं ।
गड्ढे जैसी बीमारी से ,
त्रसित मौन आराम नहीं ।।
कहीँ कोई बेचारी लिखता,
कहीं लिखता 'अनुज'किनारी ।
कदम -कदम ,ऊबड़-खाबड़ हूँ,
घायल सड़क पुकारी ।।
डॉ अनुज प्रताप सिंह चौहान "अनुज" अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)

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