Tuesday, August 25, 2020

आओ अच्छाई का प्रचार करते है

हम भारत की तक़दीर है।

हम भारत की तकदीर हैं

#हिंददेश परिवार
तिथि - 25-08-2020
दिवस - मंगलवार
विष्य - हम भारत की तकदीर हैं
विधा - स्वैच्छिक

हम भारत की तकदीर हैं ..........

हम भारत के ब्च्चे हैं
इसकी शान के रक्षक हैं
हम भारत की तकदीर हैं।.....

भारत हमको जान से प्यारा है
ये माता हमारी हम इसकी संतान हैं
हम खूब पढे़ंगे खूब लिखेंगे
अच्छे नागरिक बनकर के
देश का मान बढा़एंगे।
हम भारत की .......।

सबसे हिलमिल कर रहेंगे
सबका हाथ हम बटाएंगे
हाथों में हाथ मिलाकर के
मजबूती से आगे बढ़ते जाएंगे
हम भारत की ........।

दुश्मनों से नहीं डरेंगे
ईंट का जवाब पत्थर से देंगे
स्वदेशी चीजों को अपना कर
देश को समृद्ध बनाएंगे।
हम भारत की .......।

नये नये हम उद्योग लागाएंगे
विकास का नया दौर लाएंगे
कृषि में विषमुक्त खाद अपनाकर
धरती की जान बचाएंगे।
हम भारत की ....... ।

जिस्म को फौलादी बनाकर
दिल में प्यार बसाएंगे
हर एक को अपने साथ लेकर
मिलकर मंजिल तय करेंगे।
हम भारत की ....... ।

कितनी बाधाएँ आए राह में
सबको दूर करते जाएंगे
वृक्षारोपण का अभियान चला के
पर्यावरण हम बचाएंगे।
हम भारत की .......।

हम सब खूब काम करेंगे
आलस्य नही अपनाएंगे
पसीना खूब बहाकर के
खेतों को लहलहाएंगे।
हम भारत की .......।

सर्वोपयोगी अनुसंधान कर के
जीवन को सुखमय बनाएंगे
ये देश है हमको प्राणों से प्यारा
इसको स्वर्ग सा सुन्दर बनाएंगे।
हम भारत की ........ ।

दुनिया भर में प्रेम बढा़लएंगे
वसुधैव कुटुंबकम को दोहराएंगे
सबका एक परिवार बनाकर
सर्वे भवन्तु सुखीनः गीत हम गाएंगे।
हम भारत की ........।

स्वरचित, मौलिक
बजरंग लाल केजडी़वाल

Saturday, August 22, 2020

#हिंददेश परिवार♥️🙏🇮🇳🌺♥️👍👌
तिथि - 21-08-2020
दिवस - शुक्रवार
विषय - यारों साथ साथ चलें, प्यार बाँटते चलें
विधा - सकारात्मक गीत

आओ साथियों हम सब मिल एक साथ चलें
एक दूजे के हाथों में हाथ डाल चलें
सबके लिए दिल में ढेर सारा प्यार भर के चलें
जो भी मिले रस्ते में सब में प्यार बाँटते चलें।
आओ साथियों हम सब......................।

आओ अर्चना, माधुरी आओ, इंदु को भी साथ ले लें
आओ संतोष, देवकांत आओ बबली बहन को बुला लें
प्रतिभा, पद्मा, निरजा, अर्पणा इन्दु दीदी को ले लें
माधवी, राधिका, वंदना तुम सब जल्दी इकट्ठी हो लें
भर भर दिल प्यार बस प्यार ही ले साथ चले।
जो भी मिले रस्ते में सब में प्यार बाँटते चलों।

मनीष, समीर, शंकर, माणिक सब तैयार हो लें
हेरम्ब कुमार ललन गुप्ता भाई की भी टोली बना लें
राहुल, विक्रांत, दीपक, मुकेश को जल्दी बुला लें
शिव, योगेश सब भाई बिना देर किए आने को बोलें
आँखों में सपने दिल में प्यार का पैगाम ले चलें
जो भी मिले रस्ते में सब में प्यार बाँटते चलो।

रीना, गीता, नूतन, स्वाति, कल्पना बहन साथ चलें
प्रिया, प्रियंका, ज्योति, कुमकुम बहने मिल कर चलें
ओ भैया, ओ बहना, ओ पुष्पा दीदी, सब मेरे साथ हो लें
जो भी मिले रस्ते में सब में प्यार बाँटते चलो।

आओ साथियों हम सब मिल एक साथ चलें
जो भी मिले रस्ते में सब में प्यार बाँटते चलें
हर दिल से नफरत दूर भगाते चलें
सबको प्यार से समझा बुझा अपना बनाते चलें।
जो भी मिले रस्ते में सब में प्यार बाँटते चलें।

सबके दुःख दर्द मिटाते चलें सुख देते कष्ट हरते चलें
सब में नव उत्साह नव उमंग का जोश भरते चलें
सबका साथ, सबका विकास करते चलें
सबका विश्वास जीत जीवन धन्य करते कराते चलें।
जो भी मिले रस्ते में सब में प्यार बाँटते चलें।

हम सब हैं बहन भाई एक ही परमात्मा के हैं अंश
सबको ठंडे दिमाग से समझा के अमन चैन लाते चलें
सब हैं महान सब हैं दिव्य सबके गुणों को उभारते चलें
सब करें आत्म कल्याण ऐसी मुहिम चलाते चलें
जो भी मिले रस्ते में सब में प्यार बाँटते चलें।

प्यार बाँटते चलें, प्यार बाँटते चलें
क्या बच्चे क्या बुढे़, क्या बहनें क्या भाई सबको
स्वास्थ्य बाँटते चलें सबको स्वास्थ्य बाँटते चलें
आओ साथ साथ चल प्यार बाँटते चलें,
प्यार बाँटते चलें ....................।

स्वरचित, मौलिक
बजरंग लाल केजडी़वालल

Monday, August 17, 2020

*स्वर्ग से सुंदर देश हमारा*

देश  बहुत   है  इस  धरती  पर
पर भारतभूमि है  सबसे  प्यारी
स्वर्ग से प्यारी भारतभूमि हमारी
इस  पुण्यभूमि  पर  मिला जन्म
सच ये  बात  नहीं  कोई आम है
इस  पावन  मिट्टी  को  अर्चि का
झुकाकर  सर बारंबार  प्रणाम है
एकता  में है  छुपी  शक्ति हमारी 
देश बहुत......

आओ  विश्व  को  लाभांवित  करे
अपने प्रेम से ओतप्रोत  संदेशों से 
पूरे  विश्व  का  कल्याण  करें  हम
अपने  सुंदर- सुखद  उपदेशों   से 
प्रेम से दुनिया को फतह करने की
भारतवर्ष  की है अद्वितीय  तैयारी
देश बहुत.........

दुनिया   सुंदर  कैसे   बन  सकती
तोप -तलवारों  और  हथियारों  से
सुंदर बनेगी यह सुंदर व्यवहारों से
पूरी  सृष्टि गूंजेगी  प्रेम के नारों से
प्रेम से ही  सृजित है दुनिया सारी
देश बहुत....

आओ हाथ मिलाकर बाँटे प्यार
सुंदर - खुशहाल  बनाएँ  संसार
आसमान -धरती  में छाए बहार
हर दिन को मनाएँ जैसे त्योहार
जहाँ  प्रेम हो  सब  की लाचारी
देश बहुत.....

*अर्चना पांडेय अर्चि*
*तिनसुकिया, असम*
*रेशमी एहसास*

ऊपर नीला गगन
नीचे दुल्हन सी सजी धरती
हरी पोषाक में
बिछी है हरी घास
मुलायम चादर सी....

सुगंधित हवा
जैसे पायल बजाती हुई
रुनझुन-रुनझुन
कानों में मिसरी घोल रही है

उस मुलायम चादर नुमा घास पर
बैठे हैं
हम-तुम 
सौंदर्य चारों तरफ बिखरा है
आसमान से लेकर धरती तक
भावों की सुंदरता
में डूबे हुए हैं हम तुम
शांत वातावरण

तुमने जब अपनी
दोनों हथेलियों के बीच
मेरे हाथों को रखा
दोनों का दिल साथ में धड़का
यह दुनिया का सबसे सुखद अनुभूति है
तुम्हारे दिल के अंदर
अपनी धड़कन महसूस करना
हाँ, स्वर्ग है न हमारे आस-पास।

अर्चना पांडेय अर्चि
*प्रेम का रंग लाल*

लाल रंग
सूरज का अद्वितीय पहचान है
पहचान है यह ओज का, तेज का
लाल रंग है हमारे अंदर बहता लहू का
एक तरफ सूरज का लाल रंग
पूरी सृष्टि को पोषित करता है
दूसरी तरफ लहू का लाल रंग
शरीर को ऊर्जावान और शक्तिशाली बनाता है

लाल रंग है प्रेम का
उसी प्रेम का जिससे दुनिया
निरंतर चलती है
वही प्रेम जो 
सृष्टि के कण-कण में समाया है
लाल रंग है खुशी का
लाल जोड़े में
सजी दुल्हन, सबको लुभाती है
लाल रंग है सिंदूर का
जो सुहागिन के माँग में चमकर
उसको अद्भुत सुंदर बनाता है
लाल रंग प्रतीक है 
सम्पन्नता का,
वैभवता का

लाल रंग से प्रेम करके
मजबूत करें
अपने रिश्तों को
अपनी सृष्टि को
कोई भी बरबस यह कह सके
लाल रंग, रंग है प्रेम का
खुशहाली का ।

अर्चि
*तुमसे कहने को*

तुमसे कहने को   बातें   बहुत है मगर
होंठ चुप है झुकी है  हमारी   ये  नज़र
तुमको पाकर भी हम  यू  तड़पते  रहे
दर्द दिल की  ये  जानम  किससे  कहे
है  काँटो  भरा   मोहब्बत   का  सफ़र
तुमसे......

तोड़कर आ जाओ सारे बंधन साजन
तुम   बिन  लगे न  मेरा    तनहा  मन
दुनिया  क्या  कहती  भूलो  ये बालम
प्रेम अपनी पूजा प्रेम  है अपना  धरम
प्रेम  अब तो  करेंगे  हम  आठों  पहर
तुमसे ......

चाँद-सूरज  सुनाएँगे  अपनी  जुबानी
सारी दुनिया  कहेगी  अपनी  कहानी
तुम बनो  मेरे राजा मैं बनूँ  तेरी  रानी
न  चलने  देंगे   दुनिया  की  मनमानी
दो न सबको अपने  प्यार  की  खबर
तुमसे ......

सुनो प्यार  तो  खुदा की   इबादत  है
इस  जहाँ  की    हसीन   ज़रूरत   है
प्यारा    दिल से  संसार  खूबसूरत  है
प्रेम   में बसती  ईश्वर    की  सूरत   है
प्यार   से  अछूता  रहे   न कोई  शहर
तुमसे.......

अर्चना पांडेय अर्चि
तिनसुकिया, असम

Monday, August 10, 2020

संचयन भाग -1गिल्लू

संचयन भाग -1

गिल्लू

पाठ्यपुस्तक के बोधात्मक प्रश्नोत्तर

प्रश्न1. सोनजुही में लगी पीली कली को देखकर लेखिका के मन में कौन-कौन से विचार उमड़ने लगे?
उत्तर: सोनजुही की पीली कली को देखकर लेखिका को नन्हें गिल्लू का संस्मरण हो आया।  सोनजुही के नीचे ही गिल्लू की समाधि बनाई गई थी इसलिए लेखिका जब भी सोनजुही की पीली कली को देखती उनको लघुजीव गिल्लू की बरबस याद आ ही जाती।
2 पाठ के आधार पर कौए को एक साथ समादरित और अनादरित प्राणी क्यों कहा गया है?
उत्तर:  कौआ पितृपक्ष में पुरखों  के रूप में अन्न ग्रहण करते हैं, लोग उनको खाना खिलाकर ऐसा सोचते है कि वे अपने पूर्वजों को खाना खिलाएं है । जब घर की मुंडेर पर कौआ बोलता है तो ऐसा माना जाता है कि कोई प्रियजन घर आने वाला है। कौआ की आवाज़ कड़वी होने की वजह से लोग तीखी प्रतिक्रिया देने वालों से उसकी तुलना करते हैं। इन दो तथ्यों के आधार पर कौए को समादरित और अनादरित प्राणी कहा जाता है।

3. गिलहरी के घायल बच्चे का इलाज 
किस प्रकार किया गया?
उत्तर: लेखिका महादेवी वर्मा पशु प्रेमी थीं । वे गिलहरी के बच्चे के घाव को पोछ पेनिसिलिन लगाई तथा रुई की बत्ती बनाकर उस नन्हें से जीव को दूध और पानी पिलाया जिससे सिर्फ तीन दिनों में ही वह स्वस्थ्य हो गया।

प्रश्न 4. लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू क्या करता था?
उत्तर: जब लेखिका लिखने के लिए बैठती तो गिल्लू उनका ध्यान भटकाने 
लेखिका के पैर तक जाकर सर्र से परदे पर चढ़ जाता और फिर उसी तेजी से नीचे उतर आता। वह यह क्रिया तब तक करता जब तक लेखिका उसके तरफ आकर्षित होकर उसे पकड़ न लेती।

प्रश्न5. गिल्लू को मुक्त करने की आवश्यकता क्यों समझी गई और उसके लिए लेखिका ने क्या उपाय किया?
उत्तर: जब नन्हें गिल्लू के जीवन का प्रथम वसंत आया तो खिड़की के बाहर गिलहरियाँ आकर चिक-चिक करके उसे बुलाने लगी इसलिए लेखिका ने खिड़की की जाली का एक कोना खोल दिया। अब आराम से गिल्लू बाहर -भीतर कर सकता था।

प्रश्न6. गिल्लू किन अर्थों में परिचारिका की भूमिका निभा रहा था?
उत्तर: दुर्घटना के बाद जब लेखिका अस्पताल से घर आई तब गिल्लू तकिए पर उनके सिराहने बैठकर अपने नन्हें - नन्हें  पंजों से उनके सिर और बालों को सहलाता रहता था।

प्रश्न 7.गिल्लू की किन चेष्टाओं से लगने लगा था कि अब उसका अंत समय समीप है?
उत्तर: गिलहरियों का जीवनकाल सिर्फ दो वर्षों का ही होता है।  गिल्लू खाना पीना छोड़ दिया। अब वह बाहर जाकर अन्य गिलहरियों के साथ खेलता भी नहीं गया। रात में वह झूले से उतरकर लेखिका के समीप जा पहुंचा और ठंडे पंजों से उंगली पकड़कर हाथ से चिपक गया जिससे लेखिका को आभास हो गया कि गिल्लू का अंत समय आ गया है।

प्रश्न 8. 'प्रभात की प्रथम किरण के स्पर्श के साथ ही वह किसी और जीव न में जागने के लिए सो गया।' का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सुबह होते ही गिल्लू ने अपना प्राण त्याग दिया। लेखिका को यह विश्वास हुआ कि गिल्लू किसी और योनि में अवश्य जन्म लेगा। ऐसा कहा जाता है कि मृत्यु के बाद आत्मा किसी अन्य जीव के रूप में जन्म लेती है। लेखिका के अनुसार गिल्लू भी कोई दूसरा शरीर अवश्य धारण किया होगा।
प्रश्न 9. सोनजुही की लता के नीचे बनी गिल्लू की समाधि से लेखिका के मन में किस विश्वास का जन्म होता है?
उत्तर: लेखिका महादेवी वर्मा यह सोचकर संतुष्ट है कि उनका नन्हा गिल्लू अपने पसंदीदा सोनजुही के पीले फूल के रूप में एक न एक दिन अवश्य खिल उठेगा।


Saturday, August 8, 2020

पाठ 2 दुःख का अधिकार कक्षा 9

पाठ 2 
दुःख का अधिकार 
कक्षा 9
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर 
मौखिक 
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए l 
प्रश्न 1. किसी व्यक्ति का पोशाक देखकर हमें क्या पता चलता है ?
उत्तर : किसी व्यक्ति का पोशाक देखकर उसकी समाजिक स्थति का पता चलता है l  अर्थात वह व्यक्ति धनी या निर्धन है इसको आसानी से जाना जा सकता है l 

प्रश्न 2. खरबूज़े बेचने वाली स्त्री से कोई खरबूज़े क्यों नहीं खरीद रहा था ?
उत्तर : खरबूज़े बेचने वाली स्त्री से कोई भी इस लिए खरबूज़े नहीं खरीद रहा था क्योंकि वह अपने सर को दोनों घुटनों के बीच रखकर रो रही थी l और आस-पास के लोग उसके घर में सूतक होने की वजह से उससे खरबूज़े नहीं ले रहे थे l 

प्रश्न 3. उस स्त्री को देखकर लेखक को कैसा लगा ?
ऊतर : उस बिलखती हुई स्त्री को देखकर लेखक का मन द्रवित हो गया तथा उसके दुख को जानने के लिए व्याकुल हो उठा l 

प्रश्न 4. उस स्त्री  के लडके की मृत्यु का कारण क्या था ?
उत्तर : उस स्त्री के बेटे की मृत्यु साप के काटने की वजह से हुई थी l 

5. बुढिया को कोई भी उधार क्यों नहीं देता था ?
उत्तर : पैसे वापस न मिलने के भय से उस बुढिया को कोई भी उधार नहीं देता था क्योंकि उसके इकलौते कमाऊ बेटे की मृत्यु हो चुकी थी l 

लिखित 
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30) शब्दों में लिखिए l 
1. मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्व है ?
उत्तर : किसी भी मनुष्य का पोशाक समाज में उसका दर्जा तय करती है l पोशाक मनुष्य के जीवन में बहुत महत्व रखती है l पोशाक मनुष्य को वर्गों में विभाजित करती  है l अच्छे पोशाक से कई बार हमारे काम बन जाते हैं तथा बुरे कपड़ों की वजह से कई बार हमारा काम नहीं बन पाता हैं l 

2.पोशाक हमारे लिए कब बंधन और अडचन बन जाती है ?
उत्तर : पोशाक हमारे लिए तब बंधन बनती है जब हम चाह कर भी अपनी श्रेणी से निचली श्रेणी के लोगों को  उनकी पोशाक की वजह से मदद नहीं कर पाते हैं l इस प्रकार पोशाक हमारे लिए बंधन बन जाती है l

3. लेखक उस स्त्री के रोने का कारण क्यों नहीं जान पाया ?
उत्तर : लेखक अपनी सुंदर पोषक की वजह से उस स्त्री के रोने का कारण नहीं जान पाया l लेखक साफ़ सुथरे कपड़ों में था जबकि उस स्त्री की पोशाक मैली थी l  
 4. भगवाना अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था ?
उत्तर  : भगवाना के पास डेढ़ बीघा जमीन थी जिसपर वह हरी सब्जियां और तरबूज़े लगाकर अपने परिवार का निर्वाह करता था l 

5. लड़के के मृत्यु के दूसरे दिन ही बुढिया खरबूज़े बेचने क्यों चल पड़ी ?
उत्तर :  बुढिया के घर में जो कुछ भी था वह भगवाना के झाड- फूँक में खर्च हो गया l उसके घर में कमाई करने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं था l उसकी बहू  को तेज बुखार था तथा उसके पोते – पोती भूख से बिलख रहे थे इसलिए बुढिया को उसके बेटे की मृत्यु के दूसरे दिन ही खरबूज़ा बेचने जाना पडा था l
 
6. बुढिया के दुख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई ?
उत्तर : गरीब लोगों को दुख मानाने का भी वक्त नहीं होता क्योंकि उनकी रोजी – रोटी कैसे चलेगी अगर वे दुख मानाने के लिए घर में रहेगे l लेखक उस स्त्री के गहरे दुख का अंदाज़ा लगाना चाहता था l उसके पड़ोस की  अमीर महिला अपने बेटे की मृत्यु के बाद करीब ढाई महीने तक पलंक से उतरी ही नहीं l गरीब होने की वजह से उस स्त्री के पास दुख मानाने तक के अधिकार नहीं था l 

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ( 50 -60) शब्दों में लिखिए l –
प्रश्न 1. बाज़ार के लोग खरबूज़े बेचने वाली स्त्री के बारे में क्या –क्या कह रहे थे ? अपने शब्दों में लिखिए l 
उत्तर : बाज़ार  के लोग खरबूज़ा बेचने वाली स्त्री के बारे में अनेकों तरह की बातें बना रहे थे l बेहाया, बेशर्म, धर्मभ्रष्ट, पेट के लिए जीने वाली आदि नामों से उसे पुकार रहे थे l एक ने तो यहाँ तक कह दिया कि इसके खरबूज़े को खाने से धर्म – ईमान सब नष्ट हो जाएगा l
प्रश्न 2. पास – पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को क्या पता चला ?
उत्तर : पास – पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को पता चला कि उस बूढी स्त्री के इकलौते बेटे की मृत्यु साप के काटने की वजह से हो गई है l उसकी सारी  संपत्ति बेटे को बचने में खर्च हो गई हैl उसके घर में बीमार बहू और पोते – पोती है जो भूखे है l इन्हीं कारणों से उस स्त्री को  खरबूज़ा बेचने के लिए बाज़ार में बैठना पड़ा l 

प्रश्न 3. लड़के को बचाने के लिए बुढिया माँ ने क्या – क्या उपाय किए ?
उत्तर : अपने जवान इकलौते बेटे को बचाने के लिए बुढिया ने कोई कसर      
    नहीं छोड़ा l पहले ओझा से झडवाया, नाग देवता की पूजा करवाई, दान दक्षिणा दिया, बेटे से सभी लिपट कर रोए ताकि उनका दुख देखकर भगवाना उठकर बैठ जाए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ l 

4. लेखक ने बुढिया के दुख का अंदाजा कैसे लगाया ?
उत्तर : लेखक अपनी पड़ोस की औरत को याद करते हुए बुढिया के दुख का अंदाजा लगाया l लेखक के पड़ोस की धनी औरत ढाई महीने तक पलंग से ही नहीं उतरी l दो-दो डॉक्टर उसके देख – रेख में लगे रहते थे l ठीक इसके विपरीत उस बुढिया को अपने बेटे की मृत्यु के दूसरे दिन ही रोजी – रोटी के जुगाड़ में निकलना पड़ा l 
5. इस पाठ का शीर्षक ‘दुःख का अधिकार कहाँ’ तक सार्थक ? स्पष्ट कीजिए l 
उत्तर : इस पाठ का शीर्षक ‘दुःख का अधिकार‘ पूरी तरह से सार्थक है l गरीब और धनी दोनों के दुख एक बराबर ही होते हैं फिर भी अमीर व्यक्ति पैसे के बल से अपने दुख के दिनों में दुख मानाते है जबकि गरीब लोग ऐसा नहीं कर पाते क्योंकि उनको रोजी – रोटी के लिए काम पर जाना पड़ता है l इस पाठ में दो पुत्र वियोगिनी माताओं का उदहारण देते हुए लेखक ने बताया है कि गरीब और अमीर दोनों माताओं के पुत्र की मृत्यु हो जाती है l एक माता जो धनी है वह करीब ढाई महीने पलंग से नहीं उतरती तथा इसके विपरीत दूसरी माता को पैसे का आभाव होने की वजह से अपने बेटे की मृत्यु के दूसरे दिन ही खरबूज़े बेचने के लिए जाना पड़ता है l
 
(ग)निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए l 
1. जैसे वायु की लहरें कटी हुई पतंग को सहसा भूमि पर नहीं गिर जाने देतीं उसी तरह खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुक सकने से रोके रहती है l 
आशय – पोशाक लोगों को वर्गों में विभाजित करती है l पीड़ित व्यक्ति अगर गरीब वर्ग से संबंध रखता है तो हमारी पोशाक उसको मदद करने नहीं देती,  जैसे कटी पतंग को वायु की लहर एकाएक जमीन पर नहीं गिरने देती l 

2. इनके लिए बेटा- बेटी, खसम – लुगाई, धर्म ईमान सब रोटी का टुकड़ा है l 
आशय – उक्त कथन के माध्यम से लेखक ने हमारे समाज के लोगों की सोच पर प्रकाश डाला है l वह गरीब लाचार बुढिया जिसे अपने जवान बेटे की मृत्यु के दूसरे दिन ही रोजी – रोटी की तलास में निकलना पड़ा, उसको लोग बहुत ही बुरी नज़र से देखते है और उसके लिए गंदी-गंदी बातें कहते हैं l 
3. शोक करने, गम मनाने के लिए भी सहूलियत चाहिए और.... दुःखी होने का भी एक अधिकार होता है l 
आशय :  अगर गरीब लोग किसी दुख की वजह से घर में बैठ जाएंगे तो खाएं बिना मर जायेंगे l उनकी रोजी – रोटी पर आफत आ जाएगी l धनी व्यक्ति अगर कुछ दिन काम न भी करें तो वह खाए बिना नहीं मरेगा l 

प्रश्न 2. निम्नलिखित शब्दों के पर्याय लिखिए l 
ईमान, बदन, अंदाज़ा, बेचैनी, गम, दर्जा, जमीन, जमाना, बरकत 
उत्तर : ईमान – विश्वाश, धर्म 
      बदन – शारीर, देह, गात, तन 
      अंदाज़ा –अनुमान 
      बेचैनी – व्याकुलता 
      गम – शोक, वेदना, पीड़ा 
      दर्ज़ा – श्रेणी, वर्ग, स्तर 
     ज़मीन- पृथ्वी, भूमि, धरती 
     ज़माना – युग, समय,संसार, दुनिया  
     बरकत – वृद्धि, उन्नति 

प्रश्न 3. निम्नलिखित उदहारण के अनुसार पाठ में आए शब्द- युग्मों को छाँटकर लिखिए – 
उदाहरण: बेटा - बेटी 
उत्तर : ईमान – धर्म 
      पास – पड़ोस 
      खसम – लुगाई 
      पोता – पोती 
      दान – दक्षिणा 
      चुनी – भूसी 
      धर्म- फूँकना 
      छन्नी – ककना 
      दुअन्नी- चवन्नी 

प्रश्न 4. पाठ के संदर्भ के अनुसार निम्नलिखित वाक्यांशों की व्याख्या कीजिए- बंद दरवाज़े खोल देना, निर्वाह करना, भूख से बिलबिलाना, कोई चारा न होना, शोक से द्रवित हो जाना l 
बंद दरवाज़े खोल देना – तरक्की के नए रास्ते मिल जाना l 
निर्वाह करना – घर का खर्च चलाना l 
बुख से बिलबिलाना – भूख की वजह से बेचैन होना l 
कोई चारा न होना – कोई दूसरा उपाय न होना l 
शोक से द्रवित होना – दुख से अत्यधिक परेशान होना l 
प्रश्न 5. निम्नलिखित शब्द युग्मों  और शब्द समूहों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए – 
(क) छन्नी – ककना       अढाई- मास        पास – पड़ोस 
   दुवन्नी – चवन्नी       मुँह – अँधेरे       झाडना – फूँकना 
   (ख)फफक – फफककर   बिलख-बिलखकर
   तड़प – तड़पकर         लिपट- लिपटकर 
छन्नी – ककना – भगवाना की जान बचाने के लिए उसकी बूढी माँ ने छन्नी –ककनी तक बेच दी l 
अढाई – मास – धनी परिवार की महिला अपनी पुत्र की मृत्यु से शोकग्रसित होकर   ढाई मास तक पलंग से नहीं उतरी l 
पास – पड़ोस – भगवाना की माँ को उसके पास – पड़ोस के लोग भी भला – बुरा कह रहे थे l 
दुअन्नी – चवन्नी – आज के जमाने में दुवन्नी- चवन्नी में कुछ नहीं मिलता है l 
मुँह – अँधेरे – किसान मुँह अँधेरे से ही काम में लग जाते हैं l 
झाडना-फूँकना-  हमें झाड़-फूँक में विश्वाश नहीं करना चाहिए l 
(ख) फफक – फफककर – अपने जवान बेटे की मौत पर बुढिया फफक – फफकर रोई l 
बिलख-बिलखकर – भूख की वजह से छोटे बच्चे बिलख –बिलखकर रो रहे थे l 
लिपट – लिपटकर – बूढी माँ अपने मृत पुत्र से लिपट – लिपटकर रोई l 

प्रश्न 6. निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं को ध्यान से पढ़िए और इसी प्रकार के कुछ और वाक्य बनाइए l 
(क)
1. लड़के सुबह उठते ही भूख से बिलबिलाने लगे l 
2. उसके लिए तो बाज़ाज़ की दूकान से कपड़ा लाना ही होगा l 
3. चाहे उसके लिए माँ के हांथों के छन्नी – ककना ही क्यों न बिक जाएँ l  
(ख)
1. अरे जैसी नियत होती है, अल्लाह भी वैसी ही बरकत देता है l 
2. भगवाना जो एक दफे चुप हुआ तो  फिर न बोला l  
उत्तर –(क) 
1.  बादल छाते ही मोर नाचने लगे l 
    पुलिस के आते ही शराबी भाग गाएं l 
2. परीक्षा में अव्वल आने के लिए पढाई करनी ही होगी l 
   मजबूत शारीर बनाने के लिए हमें कशरत करना ही होगा l 
3. चाहे पढाई करने के लिए मुझे घर ही क्यों न छोड़ना पड़े l
   बाज़ार जाने के लिए चाहे मुझे बारिश में ही क्यों न भींगना पड़े l 
(ख) अरे जैसी सोच होती है वैसी ही ज़िंदगी होती है l
    जैसी करनी होती है ठीक वैसा ही फल मिलता है l 
2. कोरोना जो एक बार बढ़ी  तो कम ही नहीं हुई l  
  आग जो एक बार लगी वह तो बुझ ही नहीं पाई l     

   
 
           
       
 
    

  



  

Thursday, August 6, 2020

कक्षा 10 पर्वत प्रदेश में पावस

कक्षा 10
पाठ -5
स्पर्श 
पर्वत प्रदेश में पावस 
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर 
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

प्रश्न 1. पावस ऋतु में प्राकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते है? कविता के आधार पर स्पष्ट  कीजिए l 
उत्तर : पावस ऋतु में प्रकृतिक अनेकों परिवर्तन होते हैं l आकाश में काले बादल छाए रहते हैं l चारो तरफ सिर्फ पानी ही पानी दिखाई देता क्या धरती क्या असमान l रिमझिम बारिस की फुहारे पड़ने लगती है l तालाब और नदी पानी से भर जाते हैं l चारों तरफ हरियाली छा जाती है l पहाड़ी इलाके में प्राकृतिक का रूप पल – पल बदलने लगता है l घने बादल छाने से कुछ भी दिखाई नहीं देता है l ऐसा लगता है की आसमान धरती पर टूट पडा है l कवि के अनुसार इतनी बारिस होती है कि पहाड़ों पर उगे विशाल शाल के पेड़ तक दिखाई नहीं देते l सब कुछ विलुप्त हो जाते, जल से उठता हुआ धुआ आकाश में उड़ने लगता है l कवि को ऐसा लगता है जैसे इंद्र देवता अपनी जादूगरी दिखा रहे है l 

2. ‘मेखलाकार’ शब्द का क्या अर्थ क्या है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग क्यों किया है ?
उत्तर : मेखलाकार शब्द का अर्थ है गोल घेरे वाला l कवि ने इस शब्द का प्रयोग पर्वत के विशेषण के रूप में किया है l पर्वत का आकार गोल होने की वजह से उसका विशाल प्रतिबिम्ब नीचे स्थित तालाब में दिखाई देता है l 

3.’सहस्त्र दृग सुमन’ से क्या तात्पर्य है ? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए  किया होगा? 
उत्तर : ‘सहस्त्र दृग सुमन’ से कवि का यह कहना चाहता है कि पर्वत पर खिले हुए पुष्प अपने आँखों के द्वारा नीचे संचित जल राशि में अपनी तसवीर बड़े ध्यान से देखते हैं l 

4. कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों ? 
उत्तर : कवि ने तालाब की समानता दर्पण के साथ की है क्योंकि तालाब के पानी रूपी दर्पण में पर्वत अपने विशाल रूप को निहारा करता है l 

5. पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे – ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे और वे किस बात से प्रतिबिंबित करते है ?
उत्तर : पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे – ऊँचे वृक्ष आकाश की ऊंचाई छूने के लिए आकाश को देख रहे थे आकाश की ओर वृक्षों को देखना उनके महत्वकांक्षाओं को प्रतिबिम्बित करता है l 

6. शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गएँ ?
उत्तर : शाल के वृक्ष मुसलाधार बारिश और धुंध से भयभीत होकर धरती में धँस गए l 

7. झरने किसके गौरव का गान कर रहे है बहते हुए झरनों की तुलना किससे की गई है?
ऊतर: झरने पर्वतों के गौरव का गान कर रहे है क्योंकि पर्वत ही उनका उद्गम स्थल है l झरनों की तुलना सफ़ेद मोती की लड़ियों के साथ की गई है l 

(ख) निम्नलिखित अंशों का भाव स्पष्ट कीजिए –

1. है टूट पड़ा भू पर अंबर l
उत्तर : मुसलाधार बारिश की वजह से आकाश और धरती का अंतर कवि को मिटता हुआ सा प्रतीत हो रहा है l कवि को ऐसा लग रहा है जैसे आसमान धरती पर टूट पड़ा हो l 

2. यों जलद यान में विचर- विचर था इंद्र खेलता इंद्रजाल l 
उत्तर : पर्वतीय प्रदेश में होने वाली वर्षा के अद्भुत रूप को देखकर कवि को ऐसा लगता हा कि जल के देवता इंद्र बादल  रूपी सवारी में सवार होकर अपनी जादूगरी दिखला रहे हो l 

3. गिरिवर के उर से उठ – उठ कर 
  उच्चंकंक्षाओं – से तरुवर 
  है झाँक रहे नीरव नभ पर 
  अनिमेष अटल कुछ चिंतापर 
उत्तर : इन पंक्तियों के माध्यम से कवि वृक्षों को महत्वकांक्षी बता रहा है l कवि का कहना है कि वृक्ष, आकाश के सारे रहस्यों को जानने की उत्सुकता से असमान को लगातार देख रहे हैं l 

कविता का सौंदर्य 

प्रश्न 1. कविता में मानवीकरण अलंकार का प्रयोग किस प्रकार किया गया है ? स्पष्ट कीजिए l 
उत्तर : प्रस्तुत कविता में मानवीकरण अलंकार के प्रयोग की वजह से कविता जीवंत हो गई है l पर्वत, झरना, पेड़, धरती, आकाश शाल वृक्ष और बादलों का मानवीकरण हुआ है l पर्वत अपनी ऑंखें फाड़- फाड़कर तलाब  में अपनी तसवीर देखने, बादल में पंख लगाकर इंद्र देवता द्वारा जादूगरी करना, वृक्षों को आकाश को एक टक निहारना, आकाश को धरती पर टूट पड़ना, शाल वृक्षों का धरती में धँस जाना l 

प्रश्न 2. आपकी दृष्टि में इस कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर करता है –
(क) अनेक शब्दों की आवृत्ति पर l 
(ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर l 
(ग) कविता की संगीतात्मकता पर l 
उत्तर : मेरे दृष्टि से कविता को सुंदर बनाने में सबसे ज़्यादा योगदान कविता की चित्रमयी का है l 

3. कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है l ऐसे स्थलों को छांटकर लिखिए l 
उत्तर : प्रस्तुत कविता में प्रकृतिक के सुकुमार कहे जाने वाले कवि पंत जी कविता में चित्रात्मक शैली का प्रयोग किए है l कविता में निम्नलिखित स्थलों पर चित्रात्मक शैली का प्रयोग हुआ है l 
पल – पल प्रकृतिक के रूप को बदलना l 
पर्वतों द्वारा अपनी तस्वीर पानी में देखना l 
झाग से भरे हुए झरनों का मधुर गीत-गा गाकर बहना l 
वृक्षों को असमान को एक टक देखना l 
पर्वत का गायब हो जाना l 
जल के देवता इंद्र द्वारा जादूगरी दिखाना l 
शाल के वृक्षों का जमीन में धँस जाना l         

आओ सुंदर जहाँ बनाएं

*सुंदर समाज बनाएं, आदर्श समाज बनाएं*

प्रत्येक व्यक्ति समाज का अहम हिस्सा होता है। उसकी  सोच उसके घर से शुरू होकर समाज,देश और पूरे विश्व तक पहुँचती है। एक अच्छा व्यक्ति बिलकुल खुशबू की तरह होता है जिसकी महक हर दिशाओं में बराबर ही जाती है बिना किसी भेद-भाव के। सुंदर समाज तभी सम्भव होगा जब हम और हमारी सोच दोनों सही होंगे। हमारी सोच का सीधा प्रभाव हमारे कार्य पर पड़ता है और हमारा कार्य ही हमारा भाग्य बनाता है। हमारे भाग्य के साथ हमारे परिवार का सीधा रिश्ता है। हम सुधरने की कोशिश करेंगे तो हमारा परिवार सुधरेगा, हमारा समाज सुधरेगा, हमारा देश सुधरेगा और पूरा विश्व सुंदर और सुखदाई बन जायेगा। 
इसके लिए चाहिए कि हमें दूसरे की गलतियों को नजरअंदाज करें तथा खुद को ठीक करने में इतना वक्त लगा दें कि कोई बुरा कार्य के लिए हमारे पास बिलकुल भी समय न हो। 
जब हम खुद सही होंगे तभी सुंदर और सुखद हमारा समाज भी होगा और यह धरती बहुत सुंदर और खुशहाल होगी।

जयहिंद
अर्चि

कक्षा-9 रैदास के पद

कक्षा-9 
हिंदी पाठ्यपुस्तक स्पर्श
रैदास के पद
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) पहले पद में भगवान और भक्त जिन – जिन चीजों से तुलना की गई है, उनका उल्लेख कीजिए l
उत्तर: पहले पद में निम्नलिखित चीजों से भगवन और भक्त की तुलना की गई है –
(क) चंदन और पानी
(ख) बादल और मोर
(ग) चाँद और चकोर
(घ) दीपक और बाती
(ड.) मोती और धागा
(च) सोना और सुहागा
(छ) स्वामी और भक्त

(ख) पहेले पद की प्रतेक पंक्ति के अंत में तुकांत शब्दों के प्रयोग से नाद-सोंद्रिय आ गया है, जैसे – पानी, समानी, आदि| इस पद के अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए|
उत्तर : (i) मोर-चकोरा
         (ii) बाती-राती
         (iii) धागा-सुहागा
         (iv) दासा-रैदासा

(ग) पहले पद में कुछ शब्द अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबंध है; जैसे – दीपक और बाती l ऐसे शब्दों को छाँटकर लिखिए l
उत्तर :  दीपक – बाती
           चंदन – पानी
            घन – मोरा
            चंद – चकोरा
            मोती – धागा
            सोनाहिं – सुहागा
            स्वामी –दासा
            दिन –राती

(ग) दूसरे पद में कवि ने ‘गरीब निवाजु’ किसे कहा है ? स्पष्ट कीजिए l
उत्तर : दूसरे पद में कवि ने भगवान को गरीब निवाजु कहा है क्योंकि भगवान ही गरीबों और बेसहारों की  मदद करते हैं l  भगवन की कृपा सब पर सामान ही बरसती है l भगवान की महिमा से छोटा से छोटा व्यक्ति भी ऊपर उठ कर मान – सम्मान पा सकता है l

(ड.) दूसरे पद की “ जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुही ढरै” इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए l
उत्तर : कवि का कहने का आशय यह है कि जिसे सारा संसार छोटा समझता है उसको सिर्फ भगवान ही सम्मानित पद पर आसीन कर सकता है l

(च) रैदास ने अपने स्वामी को किन – किन नामों से पुकारा है ?
उत्तर : लाल, गरीब-निवाजु, गोस्वामी और गोविंद नामों से अपने स्वामी को पुकारा है l

(छ) निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए
मोरा, चंद, बाती, जोति, बरै, राती, छत्रु, धरै, छोती, तुहीं, गुसईआ
  उत्तर : मोरा – मोर 
          चंद – चंद्रमा 
          बाती – बत्ती 
          जोति – ज्योति 
          बरै- जले 
          राती – रात 
          छत्रु – छत्र 
          छोति – छुआछूत 
          तुहीं – तुम ही / तुम्हीं 
          गुसईआ – गोसाई 

2. नीचे लिखी पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए –

(क) जाकी अंग – अंग बास समानी 
(ख) जैसे चितवत चंद चकोरा 
(ग) जाकी जोति बरै दिन राती 
(घ) ऐसी लाल तुछ बिनु कउनु करै
(ड.) नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै
उत्तर : (क) कवि रैदास के अनुसार सृष्टि के प्रत्येक कण में भगवान है l  उदाहरण  देकर कवि रैदास समझाते है कि जीवात्मा अगर पानी है तो भगवान सुगंधित चंदन है l 
(ख) इस पंक्ति के माध्यम से कवि रैदास यह बताना चाहते है कि जिस प्रकार चकोर पक्षी बिना पलक झपकाए चन्द्रमा को देखता है ठीक उसी प्रकार भगवान के दर्शन के लिए उनके भक्त उनके राह देखते रहते हैं l भक्तों का ध्यान थोड़ी देर के लिए भी भगवान से नहीं भटकता है l 
(ग) इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह बताना चाहते है कि भक्त और भगवान का संबंध बिलकुल दीपक और बाती के जैसे होता है l भगवान की उर्जा भक्त के अंदर जाकर उनको हर पल धन्य बनाता है l 
(घ) इस पंक्ति के माध्यम से कवि भगवान की महानता को दर्शाया है l उनका कहना है कि भगवान की महिमा से गरीब व्यक्ति भी धनी और नीच व्यक्ति भी सम्मानित बन बन सकता है l 
(ड.) कवि रैदास के अनुसार उनके भगवान इतने शक्तिशाली है कि पल भर में किसी भी जिव की स्थति परिवर्तित कर सकते है l नीच व्यक्ति को ऊँचे पद पर आसीन कर देता है और ऐसा करते समय वह बिलकुल भी भयभीत नहीं होता है l 

3. रैदास के इन पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए l
उत्तर : पहले पद के माध्यम से कवि यह बताना चाहता है कि कवि को अपने अराध्य की आदत पड़ चुकी है जो कभी भी नहीं छुट सकती l कवि के अनुसार भगवान की चंदन के सामान अच्छाई कवि के अंदर समा चुकी है जो उनके जीवन के हर पल को आनंदित करता है l  जिस प्रकार बादलों को देखकर मोर नाच उठता है ठीक उसी प्रकार कवि का मन भी ईश्वर में रम कर बहुत प्रसन्न हो उठता है l चकोर टकटकी लगाकर चाँद को जिस प्रकार निहारता है, दीपक की बाती दिनरात जलकर प्रकाश बिखेरती है , धागे में पिरोए मोती धागे की उपयोगिता को सार्थक कर देते है l सोना सुहागे के सम्पर्क में आकर और निखर जाता उसी प्रकार भगवान के सम्पर्क में आकर कवि का जीवन धन्य हो जाता है l 
दूसरे पद के माध्यम से रैदास जी भगवान को सर्वशक्तिमान मानते हुए बताते है कि  भगवान की कृपा से छोटा  व्यक्ति भी सम्मानित बन जाता है तथा गरीब व्यक्ति भी अमीर बन जाता है l भगवान हर असम्भव कार्य को संभव कर सकते हैl 
  

108 घण्टे चली देवी की आराधना

*हिंद देश परिवार का 108 घंटे देवी दुर्गा को समर्पित वर्चुअल कार्यक्रम* *देश विदेश के रचनाकारों ने देवी मां के साथ घर की मां की पूजा का किया ...