*रेशमी एहसास*
ऊपर नीला गगन
नीचे दुल्हन सी सजी धरती
हरी पोषाक में
बिछी है हरी घास
मुलायम चादर सी....
सुगंधित हवा
जैसे पायल बजाती हुई
रुनझुन-रुनझुन
कानों में मिसरी घोल रही है
उस मुलायम चादर नुमा घास पर
बैठे हैं
हम-तुम
सौंदर्य चारों तरफ बिखरा है
आसमान से लेकर धरती तक
भावों की सुंदरता
में डूबे हुए हैं हम तुम
शांत वातावरण
तुमने जब अपनी
दोनों हथेलियों के बीच
मेरे हाथों को रखा
दोनों का दिल साथ में धड़का
यह दुनिया का सबसे सुखद अनुभूति है
तुम्हारे दिल के अंदर
अपनी धड़कन महसूस करना
हाँ, स्वर्ग है न हमारे आस-पास।
अर्चना पांडेय अर्चि