Saturday, February 6, 2021

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां  हमारा 
हम बुलबुलों से चह्के महके वतन हमारा  ॥ 

बचपन गया जवानी, अब आ रहा बुढ़ापा 
चढ़ा रहे वतन पर भक्ति का हम  पुजापा॥ 

महफिल सजी सदा ही गाते रहे तराना 
यादे रही वतन क़ो ख़ू से पड़ा था पाना ॥ 

वो वीर  लड़ रहे है प्यारे वतन के खातिर 
बस्ती जला रहे सब हुक्मरान  काफिर ॥ 

अपना लहु बहाये हरदम  वतन तराना 
तूफ़ान बन के छाये वीरों का है फ़साना ॥ 

बेबाक इस शहर मेंं लो लुट रहा खजाना 
प्राचीर ढह रही है इसको है अब बचाना ॥ 

आओ अहद उठाये  ठोकर मेंं हो जमाना 
सोने की चिड़िया फ़िर से है देश क़ो बनाना ॥ 

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां  हमारा 
हम बुलबुलों से चह्के महके वतन हमारा ॥ 

डॉ़ इन्दिरा  गुप्ता  "यथार्थ "

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