सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा
हम बुलबुलों से चह्के महके वतन हमारा ॥
बचपन गया जवानी, अब आ रहा बुढ़ापा
चढ़ा रहे वतन पर भक्ति का हम पुजापा॥
महफिल सजी सदा ही गाते रहे तराना
यादे रही वतन क़ो ख़ू से पड़ा था पाना ॥
वो वीर लड़ रहे है प्यारे वतन के खातिर
बस्ती जला रहे सब हुक्मरान काफिर ॥
अपना लहु बहाये हरदम वतन तराना
तूफ़ान बन के छाये वीरों का है फ़साना ॥
बेबाक इस शहर मेंं लो लुट रहा खजाना
प्राचीर ढह रही है इसको है अब बचाना ॥
आओ अहद उठाये ठोकर मेंं हो जमाना
सोने की चिड़िया फ़िर से है देश क़ो बनाना ॥
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा
हम बुलबुलों से चह्के महके वतन हमारा ॥
डॉ़ इन्दिरा गुप्ता "यथार्थ "