Monday, June 21, 2021

मिसरी जइसन भोजपुरी

नमन मंच हिन्ददेश परिवार🙏🙏🙏

विधा - कविता
दिनांक - 19-06-2021

शीर्षक : मिसरी जइसन भोजपुरी बोली
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मिसरी जइसन भोजपुरी बोली।
मुखाग्र  से निकले जैसे डोली।
मीठा, लरम, कोमल सुभाव एकर,
तबे ई रंग-बिरंग के लागे रंगोली।

मन हरे, सोहाए हवे ना कुबोली। 
मिसरी जइसन भोजपुरी बोली।
अब त कै गो देशवनों में बा पसर,
गईल भोजपुरिया माटी के होली।

जे बोले से ही एके भाव मोली।
मिसरी जइसन भोजपुरी बोली।
त काहे ना उठी मनवा में लहर,
एकरो विकास ला बनाईंजा टोली।

स्वरचित एवं मौलिक कृति द्वारा :-

संतोष कुमार,
कवि, 
पश्चिमी चंपारण, बिहार।

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