नमन मंच हिन्ददेश परिवार🙏🙏🙏
विधा - कविता
दिनांक - 19-06-2021
शीर्षक : मिसरी जइसन भोजपुरी बोली
–----------------
मिसरी जइसन भोजपुरी बोली।
मुखाग्र से निकले जैसे डोली।
मीठा, लरम, कोमल सुभाव एकर,
तबे ई रंग-बिरंग के लागे रंगोली।
मन हरे, सोहाए हवे ना कुबोली।
मिसरी जइसन भोजपुरी बोली।
अब त कै गो देशवनों में बा पसर,
गईल भोजपुरिया माटी के होली।
जे बोले से ही एके भाव मोली।
मिसरी जइसन भोजपुरी बोली।
त काहे ना उठी मनवा में लहर,
एकरो विकास ला बनाईंजा टोली।
स्वरचित एवं मौलिक कृति द्वारा :-
संतोष कुमार,
कवि,
पश्चिमी चंपारण, बिहार।