विषय;- सूरज
दिन;- शुक्रवार
दिनांक;-२९/०१/२०२१
सज ढज के तू पूरब से आता
बारिसों के मौसम में तू अपने
सारे रंग बिखेर ता बादलों को
तू रंगों से इंद्रधनुष से सजता
चमकीले वस्त्र में तू कितना
दमकता सूरज तू कितना प्यारा
अपनी धूप से तू पूरी सृष्टि को
जगमगा कर तू करता पूरे दिन
पहरेदारी तेरी धूप से फैल रही
चारो तरफ हरियाली तेरी लाली
वाली भोली सूरत लगती सबको
प्यारी हर सुबह वक़्त पर आकर
किरणें फैलाकर तपती धूप से
तू सभी को जगाता शाम होते
ही तू अपने घर को लौट जाता
तेरे बिनाजीवन अधूरा तू है तो
जग में उजियारा तू नही तो दिन
में है अंधेरों का चो तरफ साया
*नीक राजपूत*
*गुजरात*
*9898693535*