Wednesday, January 27, 2021

मज़दूर

🌹🌹 मजदूरों को समर्पित मेरी रचना जो लॉकडाउन में लिखी थी..........

अभी चुनाव करवा दो बस खुद चल के आयेगी,
इन मजदूरों को ले के जाएगी,
मुफ़्त में खाना खिलाएगी,
जरा पूछे इन्हे कोई की ये होना जरूरी है,
क्या मजदूरों के लिए कुछ भी फ्री नहीं है।।
चले जाते है वो ऐसे की बस चलना जरूरी है,
कहीं रुक जाते है यूही की बस रुकना जरूरी है,
ना बिस्तर है ना माचा है ना कोई इनके ए. सी. है,
क्या मजदूरों के लिए..................
सरकार कहती है कि खाना हम ही देते है,
स्कूल, आश्रम में इनको रोक लेते है,
जरा पूछे इन्हे कोई की कभी ऐसा होता है,
थाली में पूरी चार होती है सब्ज़ी भी थोड़ी है,
क्या मजदूरों के लिए............
कोई दिल्ली से आता है कोई यू. पी. को जाता है,
पर ना कोई इन्हे पूछने वाला ना पता बताने वाला है,
चले जा रहे बस यूंही की जैसे भगवान मालिक है,
क्या मजदूरों के लिए...........
पांवों में छाले है हाथों में थैले है,
गोदी में बिटिया है और मां को संग लेते है,
क्या ये वही देश है जहां ये और हम ही रहते है,
क्या मजदूरों के लिए......
सरकार चाहती है हमें वोट मिल जाए,
ये बस हमें वोट दे जाए फिर चाहे सड़क पे मर जाए,
क्या मजदूर का जीवन इतना सस्ता है,
की नेता पेट भर जाए और मजदूर भूखा सो जाए,
बस आला कमान से यही पूछना है, कि मजदूरों के लिए............
 
नगेन्द्र बाला बारेठ
हाल निवासी दिल्ली

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