नमन मंच
बड़े सुहाने हैं ये दिन
नाचें गाएँ और ख़ुशियाँ मनाएँ।
भूलकर सारा ग़म मुस्कुराएँ।
हवाएँ बिखेरेगीं दुनिया में सारी।
खुशबू के हम जो फूल खिलाएँ।ब
आँसू हमारी जो आँखों मेंछलकें।
बनकर शबनम हम बिखराएँ।
रोशनी की कहीं पर कमी न रहे।
दीपक बनकर ख़ुद को जलाएँ।
जीवन ही बन जाये सरगम
गीत बनें और ख़ुद को गाएँ।
हम बसंत ही बन सकते हैं।
पतझर चाहे कितने आएँ।