गुरू वशिष्ठ की सीख रामकथा का सार है ।
पुरुषोत्तम राम की जनवाणी में छाई आस हैं ।
गुरू शिष्य मान बचाने रूप बदल आये हैं ।
माया की नगरी में ज्ञान दीप जलाने आये हैं।
दशरथ नंदन राम की नगरी अयोध्या हैं ।
गुरू वशिष्ठ की सीख से पारंगत हो ।
अपने सत्यकर्मो का अधिकार जमाया हैं ।
दर्शन मात्र की अभिलाषा से प्रेम बन छाये हैं ।
हे अन्तरयामी जनमानस की आस तुम हो ,
पुरुषोत्तम रामकथा की जनवाणी में छाई हैं ।
गुरू शिष्य का अभिमान बचाने रूप बदल आये हो ,
गहन सुरक्षा अन्य जल की भूख मिटाने आये हो ,
शिलालेख कर्मप्रधान जनमानस विश्वास यही हैं ।
जनजागरण आस जगाने मायानगरी में आये हैं ।
कर्मवीर बलवीर केशरीनंदन कलयुग कथा यही हैं ।
अपने पितामह जल दान अर्पण सरयूतट आये हैं ।
महादेव की भक्ति में राजीव लोचन कहलाये हो
शान्तचित अनुरागीमन की प्यास बुझाने आये हैं ।
श्रीमती अनिता शरद झा
“तुलसी वाणी “
तुलसी भरोसे राम के निर्भय हो के सोय
ऐसी बाणी बोलिये जन अमृत घुल जाय।
तुलसी राम नाम से जग उजियारा होय
राह चलत जन में प्रेम प्रीत बस जाय।।
तुलसी नाम राम से जग उजियारा होय
साधक साधना नियम नीति बन जाय
राम मन मन्दिर देख ,मन भगत होई जाय
सोवत जगात प्रेम करत सबरे मन बस जाय।।
सुन्दर स्वर लहरी से ,जगत निहाल हो जाय।
ज्ञान तपस्या पाठ से , काव्य गीत बन जाय।।
कविता शब्दों से ,गुंजित वाह वाह हो जाय।
शब्दों की धरोहर कविराज के गुण ग़ाय।।
रागों रंग से जुड़ी कविता ,खानपान सब भुल जाय।
घर बाहर के ढंग देख ,अपनी लेखनी में रम जाय।।
प्रेम प्यार में बैर ना हों ,संगी साथी मीत बन जाय।
मनो मनोरम सूरत देख ,जीवन सफल हो जाय ।।
बूढ़ नही जग में कोई , हँसी ठिठोलि में रम जाय।
मन का धीरज खोये ना ,मधुर मिलन में लग जाय ।
रास रंग से जुड़ी काया दुःख दर्द भुल जाय।।
काव्य मधुर वाणी से नित्य गीत बन जाय ।
मोड़ मुस्कानो में साथ साथ मिल जाय।
जहाँ गीत ग़ज़ल कविता साथ हो जाय ।।
तुलसी साथ ना छोड़िये जीवन सुफल हो जाय ।
तुलसी सदाचार राखिए जीवन सुगम हो जाय ।
अनिता शरद झा “आद्या “मुम्बई