हम आओ मिलकर
एक ऐसा दीप जलाएँ
पूरी सृष्टि को रोशन बनाएँ
हर ओर छा जाए ख़ुशियाँ
तम न हो कहीं पर
रोशनी से भरा हो हर घर।
हम साफ़ कर लें
अपने विचारों को
जो विचारें वर्षों से हृदय में पड़ी
हमारे मन को और तन को
पहुँचा रही है नुकशान
साफ़ कर दें
उनको सदा के लिए
कर लें हल्का अपने मस्तिष्क को
भर लें खुशी अपने अंदर।
माफ़ करें ख़ुद को
और औरों को भी
अपने अंतर्मन के हर कोने में
एक दीप जलाएँ
खुशियों से जीवन महकाएँ।
हम भगवान को धन्यवाद करें
भगवान ने जो कुछ हमें दिया है
बहुत दिया है
हमें मनुष्य बनाया है
यह सर्वोत्तम उपहार है
हमारा मनुष्य जीवन।
अपने ज्ञान ज्योति से
पूरी सृष्टि को प्रकाशमय बनाएँ
आओ मिलकर हम दीप जलाएँ।
*-डॉ. अर्चना पांडेय अर्चि*
*डिब्रूगढ़, असम*