हाँ, जब मैं अकेली होती
अकेली बिल्कुल भी नहीं होती
मेरे साथ होते हैं मेरे बहुत सारे मित्र
जो पल-पल मेरे जीवन में फैलाते इत्र
उम्मीदों का दामन थामे हुए
मेरी सबसे अच्छी दोस्त है
मेरी प्यारी कलम
हर वक्त राह दिखाने वाली
एक नया रास्ता सृजन करने वाली
मेरा और एक मित्र है
सूरज दादा
जो साथ ही चलता है सदा
जहाँ मैं जाऊं, संग चलता
जिंदगी में रोशनी भरता
एक और बेहद खास दोस्त है चाँद
जिससे मैं
घँटों बाते करती हूँ
आसमान में चंद्रमा
और धरती पर मैं
फिर भी चंद्रमा
मेरी हर बात
बड़े ध्यान से सुनता है
गजल, गीत,कविता और ना जाने
क्या -क्या
हर सुख और दुःख में शामिल है चाँद
बहुत अच्छा लगता है
चाँद आसमान से मुझे देखता
और जमीन पर बैठकर मैं
अपनी हाले दिल
चाँद को सुनाती हूँ
वह बहुत ध्यान से सुनता है
मेरे सुख-दुःख का सहभागी बनता है
कहता है अर्चि
मैं तुम्हारा सबसे अच्छा मित्र हूँ
बिल्कुल चंदन जैसा शुद्ध,शीतल।